शिक्षा के अधिकार अधिनियम (RTE) के तहत चल रही अनियमितताओं और निजी प्ले स्कूलों की मनमानी पर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने सख्ती दिखाई है। बिलासपुर में इस मामले की सुनवाई करते हुए चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव को नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने सचिव को निर्देश दिए हैं कि वे शपथ पत्र के साथ जवाब प्रस्तुत करें और अगली सुनवाई में स्वयं उपस्थित रहें।
कोर्ट ने आरटीई के तहत स्पष्ट दिशा-निर्देश तय नहीं होने पर गहरी नाराजगी जाहिर की। डिवीजन बेंच ने कहा कि नियमों की देरी का फायदा कई निजी स्कूल उठा रहे हैं, जिससे जरूरतमंद बच्चों का हक प्रभावित हो रहा है। हाईकोर्ट ने शिक्षा विभाग को चेतावनी देते हुए कहा कि केवल कागजी कार्रवाई से काम नहीं चलेगा, बल्कि जमीनी स्तर पर प्रभावी निगरानी जरूरी है। इसके तहत सचिव को जिला शिक्षा अधिकारियों के कामकाज पर सीधे नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं।
सरकार की ओर से दाखिल शपथ पत्र में बताया गया कि आरटीई अधिनियम के अंतर्गत दिशा-निर्देश तैयार करने की प्रक्रिया चल रही है और जनवरी माह में रायपुर में इस विषय पर बैठक भी की गई थी। वहीं, याचिकाकर्ता पक्ष ने दलील दी कि कई शिकायतें अब भी लंबित हैं और उनका संतोषजनक समाधान नहीं किया गया है।
हाईकोर्ट ने सभी लंबित मामलों के शीघ्र निपटारे के निर्देश देते हुए स्पष्ट किया कि शिक्षा जैसे संवेदनशील मुद्दे पर किसी भी तरह की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। मामले की अगली सुनवाई 11 मार्च को होगी, जिसमें शिक्षा विभाग की जवाबदेही तय होने की उम्मीद है।
Author: Khabri Chai
Khabri Chai news portal.




