ईरान-इजराइल टकराव से दुनिया में तनाव — तेल बाजार पर असर संभव

मध्य पूर्व में तनाव उस समय और बढ़ गया जब इजराइल ने शनिवार सुबह ईरान की राजधानी तेहरान सहित कई शहरों पर हवाई हमले किए। ईरानी सरकारी मीडिया के अनुसार, दक्षिणी ईरान में हुए हमलों में 40 छात्राओं की मौत हो गई, जबकि 45 अन्य लोग घायल बताए जा रहे हैं। इस कार्रवाई के बाद दोनों देशों के बीच संघर्ष और तेज हो गया है।

हमलों  जवाब में ईरान ने भी इजराइल पर जवाबी कार्रवाई शुरू कर दी। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान ने करीब 400 मिसाइलें दागते हुए इजराइल के कई ठिकानों को निशाना बनाया। इसके अलावा ईरान ने खाड़ी क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर भी हमले किए।

रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान ने दुबई समेत खाड़ी क्षेत्र के कई रणनीतिक स्थानों को निशाना बनाया। कुवैत, कतर, बहरीन और सऊदी अरब में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर भी हमले की खबर है, जिससे पूरे क्षेत्र में सुरक्षा अलर्ट जारी कर दिया गया है।

इजराइल की ओर से किए गए हमलों में ईरान के खुफिया मंत्रालय, रक्षा मंत्रालय, परमाणु ऊर्जा संगठन और ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई के कार्यालय को निशाना बनाया गया। हमले के बाद खामेनेई को सुरक्षित स्थान पर शिफ्ट कर दिया गया है।

इजराइल ने इस सैन्य अभियान को “लायन’स रोर” नाम दिया है। वहीं अल जजीरा की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी अधिकारियों ने इसे अमेरिका और इजराइल की संयुक्त सैन्य कार्रवाई बताया है।

यह घटनाक्रम ऐसे समय हुआ है जब ईरान और अमेरिका के बीच परमाणु कार्यक्रम को लेकर बातचीत जारी थी। डोनाल्ड ट्रम्प ने पहले ही ईरान के खिलाफ सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी थी। उनका कहना था कि इस कार्रवाई का उद्देश्य अमेरिका और उसके सहयोगियों को संभावित खतरे से बचाना है।

अमरिकी प्रशासन के अनुसार, उनकी सेना ईरान की मिसाइल क्षमता को कमजोर करने और उसके मिसाइल कार्यक्रम को खत्म करने की दिशा में काम कर रही है। इस पूरे घटनाक्रम के बाद मध्य पूर्व में युद्ध जैसे हालात बन गए हैं और अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजरें अब क्षेत्र की स्थिति पर टिकी हुई हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि हालात जल्द नियंत्रित नहीं हुए तो इसका प्रभाव वैश्विक सुरक्षा और तेल बाजार पर भी पड़ सकता है।

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Author: Khabri Chai

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