एपस्टीन फाइल्स से शाही संकट: नॉर्वे की क्राउन प्रिंसेस मेटे-मारिट पर उठे गंभीर सवाल

 

ओस्लो | 5 फरवरी 2026

अमेरिका के न्याय विभाग (DOJ) द्वारा 30 जनवरी को जारी की गई बहुचर्चित एपस्टीन फाइल्स ने नॉर्वे के शाही परिवार को अभूतपूर्व संकट में डाल दिया है। इन दस्तावेजों में नॉर्वे की क्राउन प्रिंसेस मेटे-मारिट का नाम 1000 से अधिक बार सामने आने के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उनकी साख पर सवाल उठने लगे हैं।

यह पहला मौका है जब किसी यूरोपीय शाही परिवार का नाम सीधे तौर पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कुख्यात अपराधी जेफ्री एपस्टीन से जुड़े आधिकारिक रिकॉर्ड में इतनी बार दर्ज हुआ है। फाइल्स सार्वजनिक होने के बाद मेटे-मारिट ने बयान जारी करते हुए स्वीकार किया कि उस समय उनकी “निर्णय-क्षमता कमजोर थी” और उन्हें अपने अतीत पर “गहरा पछतावा” है।

मेटे-मारिट का जीवन शुरू से ही पारंपरिक शाही कथाओं से अलग रहा है। उनका जन्म 19 अगस्त 1973 को नॉर्वे के क्रिस्टियानसैंड शहर में हुआ। बचपन में माता-पिता के अलगाव के बाद उनका किशोर जीवन अस्थिरता, गलत संगत और नशीले पदार्थों की लत से घिरा रहा। उन्होंने पहले भी सार्वजनिक मंचों पर इस अतीत को स्वीकार किया है।

1997 में उन्होंने एक बेटे मारियस बोर्ग होइबी को जन्म दिया। अविवाहित मां होने के कारण उस समय नॉर्वे में व्यापक सामाजिक बहस छिड़ गई थी। वर्ष 2000 में शाही परिवार में विवाह से पहले मेटे-मारिट ने राष्ट्रीय टेलीविजन पर आकर अपने ड्रग-सर्किल से जुड़े अतीत के लिए सार्वजनिक माफी मांगी थी। अगस्त 2001 में उनका विवाह नॉर्वे के क्राउन प्रिंस हाकोन से हुआ।

हालांकि विवाह के बाद उन्होंने सामाजिक और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े कई अभियानों में सक्रिय भूमिका निभाई। वर्ष 2014 में उन्होंने “लिटरेचर ट्रेन” की शुरुआत की और 2018 में अपनी दुर्लभ बीमारी क्रॉनिक पल्मोनरी फाइब्रोसिस को सार्वजनिक कर पारदर्शिता की मिसाल पेश की।

इसी बीच, न्यूयॉर्क से जुड़ी एक अहम जानकारी भी सामने आई है। अमेरिकी न्याय विभाग को गलत एडिटिंग के चलते एपस्टीन फाइल्स से जुड़ी करीब 100 पीड़ितों की पहचान उजागर होने के बाद कई दस्तावेज अपनी वेबसाइट से हटाने पड़े। इनमें ईमेल आईडी, बैंकिंग डिटेल्स और निजी तस्वीरें शामिल थीं। इस तकनीकी चूक के कारण बुधवार को प्रस्तावित कोर्ट सुनवाई भी रद्द कर दी गई।

एपस्टीन फाइल्स के खुलासों ने न केवल न्यायिक व्यवस्था बल्कि शाही संस्थानों की विश्वसनीयता पर भी गहरी बहस छेड़ दी है।

Khabri Chai
Author: Khabri Chai

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