संघर्ष, रिजेक्शन और आत्मविश्वास की जंग: कैसे शाहिद कपूर बने बॉलीवुड के सबसे भरोसेमंद सितारों में से एक

 

बॉलीवुड में चमकती सफलता के पीछे अक्सर लंबा और कठिन संघर्ष छिपा होता है। कुछ कलाकार ऐसे होते हैं जिनकी कहानी सिर्फ स्टारडम तक पहुंचने की नहीं, बल्कि खुद को बार-बार साबित करने की होती है। अभिनेता शाहिद कपूर की जिंदगी भी कुछ ऐसी ही है। आज वे जिस मुकाम पर हैं, वहां तक पहुंचने के लिए उन्होंने तंगहाली, अकेलापन, रिजेक्शन और आत्मविश्वास के टूटने जैसे कई दौर देखे।शाहिद कपूर मानते हैं कि अच्छा काम करना सफलता की गारंटी नहीं होता, लेकिन अगर इंसान लगातार मेहनत करता रहे, तो रास्ता जरूर निकलता है। उनकी कहानी उन लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो सपनों की नगरी मुंबई में अपनी पहचान बनाने निकलते हैं।

फिल्मी परिवार, लेकिन आसान नहीं बचपन:

शाहिद कपूर का जन्म 25 फरवरी 1981 को नई दिल्ली में हुआ। उनके पिता पंकज कपूर हिंदी सिनेमा और थिएटर के जाने-माने अभिनेता हैं, जबकि मां नीलिमा अजीम भी एक संवेदनशील कलाकार और प्रशिक्षित नृत्यांगना रही हैं। बाहर से देखने पर लगता है कि शाहिद का रास्ता आसान रहा होगा, लेकिन हकीकत इससे बिल्कुल अलग थी।जब शाहिद महज तीन साल के थे, तभी उनके माता-पिता का तलाक हो गया। परिवार टूटने का असर उनके बचपन पर गहरा पड़ा। शाहिद अपनी मां के साथ किराये के घर में रहने लगे। सीमित संसाधन, भावनात्मक खालीपन और अस्थिर माहौल ने उन्हें बहुत कम उम्र में परिपक्व बना दिया।

संघर्षों में बीता बचपन, जल्दी आई जिम्मेदारी:

बाद में नीलिमा अजीम ने अभिनेता राजेश खट्टर से शादी की, लेकिन शाहिद का बचपन ज्यादातर संघर्ष के साए में ही बीता। उन्होंने कभी एक सुरक्षित और स्थिर पारिवारिक माहौल का अनुभव नहीं किया। यही कारण था कि वे बहुत जल्दी समझ गए कि जिंदगी में आगे बढ़ने के लिए खुद पर ही भरोसा करना होगा।शायद यही वजह रही कि शाहिद ने अपने करियर में कभी “स्टार किड” वाली पहचान का सहारा नहीं लिया।

पढ़ाई के साथ कला की ओर झुकाव:

शाहिद कपूर ने अपनी शुरुआती पढ़ाई राजहंस विद्यालय, मुंबई से की। इसके बाद उन्होंने मिठीबाई कॉलेज में दाखिला लिया। हालांकि पढ़ाई के दौरान ही उनका मन मंच, कैमरा और परफॉर्मेंस की ओर ज्यादा आकर्षित होने लगा था।अभिनय और नृत्य उनके लिए सिर्फ शौक नहीं थे, बल्कि खुद को व्यक्त करने का जरिया बन चुके थे। इसी जुनून के चलते उन्होंने मशहूर कोरियोग्राफर श्यामक डावर के डांस इंस्टीट्यूट से प्रोफेशनल ट्रेनिंग ली। यह फैसला उनके करियर का टर्निंग पॉइंट साबित हुआ।

बैकग्राउंड डांसर से शुरू हुआ सफर:

शाहिद कपूर ने फिल्मों में बतौर अभिनेता नहीं, बल्कि बैकग्राउंड डांसर के रूप में कदम रखा। वे सुपरहिट फिल्मों ‘दिल तो पागल है’ और ‘ताल’ में बैकग्राउंड डांसर रहे।हालांकि यह काम उन्हें पहचान नहीं दिला रहा था, लेकिन कैमरे के सामने आत्मविश्वास और इंडस्ट्री की समझ जरूर दे रहा था। बैकग्राउंड डांसर के तौर पर मिलने वाली फीस बहुत कम थी। उसी पैसे से घर का खर्च चलाना और मुंबई जैसे शहर में टिके रहना किसी चुनौती से कम नहीं था।

कपड़े खरीदने के पैसे नहीं थे:

शाहिद ने खुद स्वीकार किया है कि स्ट्रगल के दिनों में वे ढंग के कपड़े तक नहीं खरीद पाते थे। ऑडिशन के लिए कई बार उन्हें दोस्तों से कपड़े उधार लेने पड़ते थे।विडंबना यह थी कि कई ऑडिशन में उन्हें सिर्फ इस वजह से रिजेक्ट कर दिया जाता था कि उनका लुक “हीरो जैसा नहीं है”। उस दौर में यह बात उनके आत्मविश्वास को अंदर तक तोड़ देती थी, लेकिन वे हार मानने वालों में से नहीं थे।

ऑडिशन, इंतजार और लगातार रिजेक्शन:

शाहिद कपूर ने अनगिनत ऑडिशन दिए। कई बार घंटों प्रोडक्शन ऑफिस के बाहर खड़े रहना पड़ता था। कई बार तो अंदर तक बुलाया भी नहीं जाता था। दिन भर भागदौड़ के बाद भी जब एक भी मौका नहीं मिलता, तो निराशा होना स्वाभाविक था।शाहिद बताते हैं कि कई बार उन्हें लगा कि शायद वे फिल्मों के लिए बने ही नहीं हैं, लेकिन डांस और एक्टिंग के प्रति उनका जुनून उन्हें हर बार वापस खड़ा कर देता था।

पिता का नाम भी नहीं बना सहारा:

लोगों को लगता है कि पंकज कपूर जैसे अभिनेता के बेटे होने से शाहिद को इंडस्ट्री में आसानी मिली होगी, लेकिन सच्चाई इसके उलट थी। शाहिद ने जानबूझकर अपने पिता के नाम का इस्तेमाल नहीं किया।उनका मानना था कि अगर उन्हें सफल होना है, तो अपनी पहचान खुद बनानी होगी। यही वजह रही कि वे अलग रास्ता चुनते रहे और खुद को साबित करने में लगे रहे।

कैमरे के पीछे भी किया काम:

शाहिद कपूर ने 1998 में जीटीवी के सीरियल ‘Mohandas B.A.L.L.B.’ में असिस्टेंट डायरेक्टर के रूप में भी काम किया। इस शो को पंकज कपूर ने ही डायरेक्ट और प्रोड्यूस किया था।यह अनुभव शाहिद के लिए बेहद अहम रहा। एक्टिंग में आने से पहले उन्होंने कैमरे के पीछे रहकर इंडस्ट्री को समझा, जो आगे चलकर उनके काम आया।

म्यूजिक वीडियो और विज्ञापनों से मिली पहचान:

शाहिद कपूर को पहली बार पहचान मिली मशहूर म्यूजिक वीडियो ‘आंखों में तेरा ही चेहरा’ से, जिसमें उनके साथ हृषिता भट्ट नजर आई थीं। इसके अलावा वे कई विज्ञापनों और फैशन शोज़ में भी दिखाई दिए।एक पेप्सी विज्ञापन में वे शाहरुख खान, काजोल और रानी मुखर्जी जैसे सितारों के साथ नजर आए। हालांकि इन विज्ञापनों में उनका रोल छोटा था, लेकिन उनकी एनर्जी और स्क्रीन प्रेजेंस इंडस्ट्री ने नोटिस करना शुरू कर दिया था।

संघर्ष से सफलता तक:

लगातार मेहनत, धैर्य और खुद पर भरोसे ने आखिरकार शाहिद कपूर को वह मौका दिलाया, जिसने उनकी जिंदगी बदल दी। इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा और अपनी मेहनत के दम पर बॉलीवुड में अपनी अलग पहचान बनाई।आज शाहिद कपूर न सिर्फ सफल अभिनेता हैं, बल्कि ऐसे कलाकार माने जाते हैं जो किरदारों के साथ रिस्क लेने से नहीं डरते।शाहिद कपूर की कहानी इसलिए खास है क्योंकि यह बताती है कि सिर्फ टैलेंट होना काफी नहीं, बल्कि धैर्य, अनुशासन और आत्मविश्वास भी उतने ही जरूरी हैं। वे उन कलाकारों में से हैं, जिन्होंने हर रिजेक्शन को सीख में बदला और हार नहीं मानी।

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Author: Khabri Chai

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