
आज कोरबा (छत्तीसगढ़) से एक अत्यंत दुखद खबर सामने आई है जहाँ एक 20 वर्षीय कॉलेज छात्रा ने अपने घर में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। यह घटना बांकीमोंगरा थाना क्षेत्र के घुड़देवा इलाके में हुई। पुलिस ने घटना की पुष्टि की है और मामले की जांच जारी है।
जानकारी के अनुसार मृतका किसी कॉलेज में पढ़ाई कर रही थी और आज सुबह घर से कॉलेज जाने के लिए निकली थी। लेकिन वह वापस घर लौट आई और उसके बाद कुछ ही समय में उसने यह आलोक घटना को अंजाम दिया। पुलिस सूत्रों के मुताबिक छात्रा की माँ ने सुबह उसको कॉलेज जाने से पहले डांटा या फटकार लगाई थी, जिसके कुछ समय बाद उसने फांसी लगाई। पुलिस इस पूरे प्रकरण की तह तक जाने के लिए साक्ष्य इकट्ठा कर रही है और आसपास के लोगों से बयान ले रही है।
घटना की खबर मिलते ही परिवार और परिजन मातम में डूब गए। घर के सदस्यों का रो-रोकर बुरा हाल बताया जा रहा है। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिये भेज दिया है और शव जिम्मेदार परिजनों को सौंपने की प्रक्रिया चल रही है। प्रारंभिक जानकारी में यह भी पता चला है कि छात्रा की मानसिक स्थिति पर भी विस्तृत जांच की जा रही है।
यह दुखद घटना न केवल परिवार के लिये बल्कि समाज के लिये भी चेतावनी की लहर है। युवा पीढ़ी पर बढ़ते दबाव, पढ़ाई के तनाव, पारिवारिक मनोवैज्ञानिक दबाव और संज्ञानात्मक स्वास्थ्य की अनदेखी इन दिनों बड़ी चिंता का विषय बन चुकी है। विशेषज्ञ अक्सर कहते हैं कि बच्चों और युवाओं के साथ संवाद, समझ और समर्थन स्थापित करना बेहद आवश्यक है ताकि वे किसी भी कठिनाई का सामना आत्म‑विश्वास और सकारात्मक सोच के साथ कर सकें।
समाज में कई बार देखा गया है कि माता-पिता की नकारात्मक प्रतिक्रिया, डाँट‑फटकार या अधिक दबाव बच्चों में तनाव, अवसाद और अकेलापन जैसी मानसिक स्थितियाँ उत्पन्न कर सकती हैं, जो कभी‑कभी गंभीर परिणाम भी दे सकती हैं। हैल्पलाइन, काउंसलिंग और मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों की मदद लेना आज की चुनौतियों का एक सकारात्मक समाधान हो सकता है।
पुलिस इस प्रकरण की विस्तृत जांच कर रही है और यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि क्या छात्रा के आत्महत्या के पीछे केवल पारिवारिक डांट‑फटकार ही मुख्य कारण था या कोई अन्य गंभीर कारण भी कार्यरत था।
Author: Khabri Chai
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