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रायपुर।
राजधानी रायपुर में सड़क चौड़ीकरण और तेज रफ्तार अब सुविधा नहीं, बल्कि जानलेवा साबित हो रहे हैं। सरकारी आंकड़ों और सड़क सुरक्षा से जुड़ी रिपोर्ट्स के अनुसार रायपुर जिले में कुल 26 ब्लैक स्पॉट चिन्हित किए गए हैं, जिनमें शहर क्षेत्र की 5 सड़कें और ग्रामीण इलाकों की 21 सड़कें शामिल हैं। इन ब्लैक स्पॉट्स पर पिछले तीन वर्षों में 225 से अधिक लोगों की मौत सड़क दुर्घटनाओं में हो चुकी है।
ब्लैक स्पॉट वे स्थान होते हैं, जहां बार-बार सड़क हादसे होते हैं और जानमाल की सबसे ज्यादा क्षति होती है। विशेषज्ञों के मुताबिक रायपुर में सड़कें चौड़ी होने के बावजूद सुरक्षा इंतजाम, साइन बोर्ड, स्पीड कंट्रोल और पैदल यात्रियों के लिए सुरक्षित व्यवस्था का अभाव इन हादसों की बड़ी वजह है।

आंकड़ों के अनुसार, प्रशासन द्वारा बीते कुछ वर्षों में 7 ब्लैक स्पॉट को सुधारा गया, लेकिन चिंता की बात यह है कि उतनी ही संख्या में नए ब्लैक स्पॉट भी बन गए। यानी समस्या खत्म होने के बजाय लगातार बनी हुई है। सड़क डिजाइन में खामियां, अचानक कट, अवैध यू-टर्न, हाईवे पर तेज रफ्तार और भारी वाहनों की आवाजाही हादसों को बढ़ा रही है।
ग्रामीण इलाकों में स्थिति और भी गंभीर है। नेशनल हाईवे और स्टेट हाईवे से जुड़े ग्रामीण मार्गों पर लाइटिंग की कमी, संकेतक न होना और ट्रैफिक नियमों की अनदेखी आम बात है। वहीं शहर में चौड़ी सड़कों पर तेज रफ्तार वाहन, गलत पार्किंग और पैदल यात्रियों की अनदेखी जानलेवा साबित हो रही है।
सड़क सुरक्षा को लेकर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट भी चिंता जता चुका है और संबंधित विभागों से ब्लैक स्पॉट सुधार को लेकर रिपोर्ट और कार्ययोजना मांगी गई है। बावजूद इसके, जमीनी स्तर पर सुधार की रफ्तार धीमी बताई जा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि केवल सड़क चौड़ी करना समाधान नहीं है। स्पीड लिमिट का सख्त पालन, ट्रैफिक सिग्नल, कैमरे, साइनेज, रंबल स्ट्रिप्स और जागरूकता अभियान ही हादसों पर प्रभावी अंकुश लगा सकते हैं।
जब तक प्रशासन और आम नागरिक मिलकर सड़क सुरक्षा को प्राथमिकता नहीं देंगे, तब तक रायपुर की ये चौड़ी सड़कें यूं ही जानलेवा बनी रहेंगी।
Author: Khabri Chai
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