छत्तीसगढ़ को मिला नया स्थायी डीजीपी, आईपीएस अरुणदेव गौतम बने पुलिस प्रमुख

छत्तीसगढ़ में लंबे समय से लंबित पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) की नियुक्ति को लेकर अब तस्वीर साफ हो गई है। राज्य सरकार ने वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी अरुणदेव गौतम को नया स्थायी डीजीपी नियुक्त किया है। वे 1992 बैच के अधिकारी हैं और वर्तमान में प्रभारी डीजीपी के रूप में कार्यरत थे।

यह नियुक्ति सुप्रीम कोर्ट की सख्ती और संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की नोटिस अवधि समाप्त होने के बाद हुई है। दरअसल, UPSC ने राज्य सरकार से यह स्पष्ट करने को कहा था कि अब तक स्थायी डीजीपी की नियुक्ति क्यों नहीं की गई। इसके साथ ही Supreme Court of India ने भी अपने 2018 के आदेश का हवाला देते हुए स्पष्ट किया था कि किसी भी राज्य में ‘प्रभारी’ डीजीपी की नियुक्ति लंबे समय तक नहीं रहनी चाहिए।

यूपीएससी ने मई 2025 में राज्य सरकार को दो वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों—अरुणदेव गौतम और हिमांशु गुप्ता—का पैनल भेजा था। सामान्यतः तीन नामों का पैनल भेजा जाता है, लेकिन इस बार पात्र अधिकारियों की सीमित संख्या के कारण दो ही नाम शामिल किए गए। अंततः अनुभव और वरिष्ठता को देखते हुए गौतम का चयन किया गया।

गौरतलब है कि फरवरी 2025 में तत्कालीन डीजीपी अशोक जुनेजा के सेवानिवृत्त होने के बाद गौतम को प्रभारी डीजीपी की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। इसके बाद से ही स्थायी नियुक्ति को लेकर चर्चाएं जारी थीं। सुप्रीम कोर्ट के “प्रकाश सिंह बनाम भारत सरकार” मामले और हाल ही में “टी. धंगोपल राव बनाम यूपीएससी” प्रकरण में सख्त टिप्पणियों के बाद राज्य सरकार पर जल्द निर्णय लेने का दबाव बढ़ गया था।

अरुणदेव गौतम का करियर काफी व्यापक और चुनौतीपूर्ण रहा है। उनका जन्म उत्तरप्रदेश के कानपुर जिले में हुआ और उन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक तथा राजनीति शास्त्र में परास्नातक किया। इसके बाद Jawaharlal Nehru University से अंतरराष्ट्रीय कानून में एमफिल की डिग्री हासिल की।

आईपीएस बनने के बाद उन्हें पहले मध्यप्रदेश कैडर मिला, जहां उन्होंने जबलपुर और भोपाल जैसे शहरों में महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया। वर्ष 2000 में छत्तीसगढ़ राज्य के गठन के बाद उन्होंने छत्तीसगढ़ कैडर का चयन किया और यहां कोरिया, रायगढ़, जशपुर, राजनांदगांव, सरगुजा और बिलासपुर जैसे जिलों में पुलिस अधीक्षक (एसपी) के रूप में कार्य किया।

नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में उनकी कार्यशैली को विशेष रूप से सराहा गया। 2009 में राजनांदगांव में हुए नक्सली हमले के बाद उन्हें वहां भेजा गया, जहां उन्होंने स्थिति को संभालने में अहम भूमिका निभाई। इसके अलावा 2013 के चर्चित झीरम घाटी नक्सली हमले के बाद उन्हें बस्तर रेंज का आईजी बनाया गया था, जहां उन्होंने सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया और चुनावी प्रक्रिया को सफलतापूर्वक संपन्न कराया।

अपने उत्कृष्ट सेवाकाल के दौरान गौतम को राष्ट्रपति पुलिस पदक, भारतीय पुलिस पदक और संयुक्त राष्ट्र पुलिस पदक जैसे सम्मान भी मिल चुके हैं।

सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के अनुसार, डीजीपी की नियुक्ति यूपीएससी द्वारा भेजे गए वरिष्ठ अधिकारियों के पैनल में से की जाती है और चयनित अधिकारी को कम से कम 2 वर्षों का कार्यकाल दिया जाता है।

अब स्थायी डीजीपी के रूप में अरुणदेव गौतम के सामने कानून-व्यवस्था को मजबूत करने, नक्सल समस्या से निपटने और पुलिस व्यवस्था को आधुनिक बनाने जैसी बड़ी जिम्मेदारियां होंगी।

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Author: Khabri Chai

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