
छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले में अवैध रेत खनन का खेल लगातार बेखौफ जारी है। प्रशासनिक सख्ती के दावों के बावजूद खनिज विभाग इस पर प्रभावी रोक लगाने में नाकाम नजर आ रहा है। हालात यह हैं कि डंकिनी नदी से 24 घंटे नियमों को ताक पर रखकर रेत का उत्खनन किया जा रहा है।
स्थानीय लोगों के मुताबिक, दिन के समय छोटे जेसीबी मशीनों का उपयोग कर रेत निकाली जाती है, जबकि रात के अंधेरे में बड़े पैमाने पर चैन माउंटेन मशीनों के जरिए खनन होता है। यह पूरा काम बिना किसी वैध अनुमति और सुरक्षा मानकों के किया जा रहा है, जिससे न सिर्फ सरकारी राजस्व को नुकसान हो रहा है, बल्कि पर्यावरण को भी गंभीर खतरा पैदा हो गया है।
विशेष रूप से रविवार और सरकारी छुट्टियों के दिन खनन गतिविधियां और तेज हो जाती हैं, जब निगरानी और जांच की संभावना कम रहती है। ग्रामीणों का आरोप है कि कई बार शिकायत करने के बावजूद खनिज विभाग और स्थानीय प्रशासन की ओर से ठोस कार्रवाई नहीं की जाती।
विशेषज्ञों का मानना है कि नदी से इस तरह लगातार रेत निकाले जाने से जलस्तर में गिरावट, नदी के प्राकृतिक बहाव में बदलाव और आसपास के इलाकों में कटाव जैसी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। डंकिनी नदी, जो क्षेत्र की जल आपूर्ति और पारिस्थितिकी के लिए महत्वपूर्ण है, अब अवैध खनन के कारण खतरे में है।
सरकार द्वारा अवैध खनन रोकने के लिए नियम और अभियान तो चलाए जाते हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर उनका असर कमजोर दिखाई देता है। यदि समय रहते सख्त कार्रवाई नहीं की गई, तो आने वाले दिनों में स्थिति और गंभीर हो सकती है।
अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस मुद्दे को कितनी गंभीरता से लेता है और अवैध खनन पर लगाम लगाने के लिए क्या ठोस कदम उठाए जाते हैं।
Author: Khabri Chai
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