
रायपुर,30 जनवरी 2026।
छत्तीसगढ़ में तकनीक आधारित डिजिटल धान खरीदी व्यवस्था अब जमीनी स्तर पर असर दिखाने लगी है। खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 में लागू इस नई प्रणाली ने धान उपार्जन प्रक्रिया को पहले से अधिक पारदर्शी, सुव्यवस्थित और किसान-हितैषी बना दिया है। राज्य शासन की इस पहल से किसानों का भरोसा मजबूत हो रहा है और उपार्जन केंद्रों में अव्यवस्था व अनिश्चितता की शिकायतें भी घटती नजर आ रही हैं।
इस व्यवस्था की सफलता का ताजा उदाहरण ग्राम दुग्गी निवासी किसान हीरालाल के अनुभव से सामने आया है। उन्होंने सिंगहत धान उपार्जन केंद्र में 51.20 क्विंटल धान का विक्रय समर्थन मूल्य पर किया। पूरी प्रक्रिया बिना किसी बाधा के संपन्न हुई। खास बात यह रही कि उनका टोकन ऑफलाइन माध्यम से जारी हुआ था, इसके बावजूद केंद्र पर उनकी खरीदी सुचारू रूप से हुई। इससे यह संकेत मिलता है कि डिजिटल व्यवस्था के साथ-साथ उन किसानों के लिए भी वैकल्पिक प्रणाली मौजूद है, जो ऑनलाइन प्रक्रियाओं में पूरी तरह सहज नहीं हैं।
उपार्जन केंद्रों में व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने पर भी जोर दिया गया है। किसानों के लिए बैठने की समुचित सुविधा, पेयजल की उपलब्धता और भीड़ प्रबंधन की व्यवस्था ने माहौल को व्यवस्थित रखा। डिजिटल कांटों से तौल होने के कारण वजन को लेकर विवाद की गुंजाइश कम हुई है। पूरी प्रक्रिया रिकॉर्ड आधारित होने से पारदर्शिता बढ़ी है और किसानों में भरोसा कायम हुआ है।

किसान हीरालाल का कहना है कि पिछले वर्षों की तुलना में इस बार धान बेचने का अनुभव कहीं अधिक सरल और तनावमुक्त रहा। उन्हें न तो लंबा इंतजार करना पड़ा और न ही किसी प्रकार की अनिश्चितता का सामना करना पड़ा। उनके अनुसार तकनीक के उपयोग से खरीदी प्रक्रिया तेज हुई है और किसानों का समय भी बच रहा है।
कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल सिस्टम से न केवल खरीदी प्रक्रिया पारदर्शी बनती है, बल्कि डेटा प्रबंधन भी बेहतर होता है, जिससे भुगतान, रिकॉर्ड और योजना निर्माण में सुविधा मिलती है। यदि इसी तरह व्यवस्थाओं का निरंतर सुधार होता रहा, तो आने वाले वर्षों में यह मॉडल अन्य राज्यों के लिए भी उदाहरण बन सकता है।
समग्र रूप से देखा जाए तो छत्तीसगढ़ की डिजिटल धान खरीदी व्यवस्था सुशासन और किसान कल्याण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो रही है, जो किसानों के अनुभवों में सकारात्मक बदलाव ला रही है।
Author: Khabri Chai
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