
धमतरी, छत्तीसगढ़। भारत में जहां त्योहार निर्धारित तिथियों और पंचांग के अनुसार मनाए जाते हैं, वहीं धमतरी जिले का एक गांव अपनी अनोखी परंपरा के कारण अलग पहचान बनाए हुए है। जिले से करीब 30 किलोमीटर दूर स्थित सेमरा सी गांव में होली, दिवाली, हरेली और दशहरा जैसे प्रमुख त्योहार पूरे देश से लगभग एक सप्ताह पहले मनाए जाते हैं। यह परंपरा कोई नई नहीं, बल्कि ग्रामीणों की मान्यता के अनुसार सदियों पुरानी आस्था और धार्मिक विश्वास से जुड़ी हुई है।
ग्रामीणों के अनुसार, गांव में त्योहारों की तारीख कैलेंडर से नहीं, बल्कि परंपरा से तय होती है। गांव के प्रमुख आराध्य देव सिदार देव (स्थानीय देवता) की पूजा-अर्चना के बाद ही सभी बड़े पर्वों की शुरुआत की जाती है। यही कारण है कि यहां हर वर्ष प्रमुख त्योहार देशभर में मनाए जाने से पहले ही उत्साह और धूमधाम के साथ संपन्न हो जाते हैं।
गांव के बुजुर्गों का कहना है कि प्राचीन समय में यह क्षेत्र घने जंगलों से घिरा हुआ था। उस दौर में गांव में प्राकृतिक आपदाएं और बीमारियां फैलने की घटनाएं होती थीं। ग्रामीणों की मान्यता है कि इसी दौरान एक तपस्वी बाबा सिद्धार ने ग्रामीणों को निर्देश दिया कि यदि गांव के चार प्रमुख त्योहार एक सप्ताह पहले मनाए जाएंगे, तो गांव पर देवताओं की कृपा बनी रहेगी और सभी संकट दूर होंगे। ग्रामीणों का दावा है कि तब से इस परंपरा का पालन किया जा रहा है और गांव में सुख-समृद्धि बनी हुई है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि जब से यह परंपरा शुरू हुई है, तब से गांव में किसी बड़ी प्राकृतिक आपदा या महामारी जैसी गंभीर समस्या का सामना नहीं करना पड़ा। यही कारण है कि ग्रामीण इस परंपरा को अपनी आस्था और पहचान से जोड़कर देखते हैं। पीढ़ी दर पीढ़ी चली आ रही इस परंपरा को आज की युवा पीढ़ी भी पूरी श्रद्धा और विश्वास के साथ निभा रही है।
ग्रामीणों के अनुसार, हर त्योहार की शुरुआत गांव के मंदिर में विशेष पूजा के साथ होती है। इसके बाद पूरे गांव में उत्सव का माहौल बन जाता है। त्योहारों के दौरान दूर-दराज से रिश्तेदार और परिचित गांव पहुंचते हैं। मेहमानों के स्वागत के लिए विशेष पकवान बनाए जाते हैं और पूरे गांव में सामूहिक उत्सव का आयोजन होता है।
होली के अवसर पर गांव में रंग-गुलाल के साथ उत्सव मनाया गया, जिसमें स्थानीय लोग पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ जश्न मनाते नजर आए। गांव में आसपास के क्षेत्रों से भी लोग इस अनोखी परंपरा को देखने पहुंचते हैं। ग्रामीण बताते हैं कि त्योहारों के आयोजन के लिए आसपास के गांवों में निमंत्रण भी भेजा जाता है।

ग्रामीणों का यह भी दावा है कि अतीत में कुछ लोगों ने इस परंपरा को बदलने का प्रयास किया था, लेकिन कथित रूप से गांव में अप्रिय घटनाएं होने के बाद लोगों ने इसे जारी रखने का निर्णय लिया। इसके बाद से गांव में इस परंपरा का सख्ती से पालन किया जाता है।
अपनी विशिष्ट परंपरा के कारण सेमरा सी गांव अब क्षेत्र में चर्चा का विषय बन चुका है। यहां की परंपरा को देखने के लिए पर्यटक और शोधकर्ता भी पहुंचने लगे हैं। यह गांव न केवल धमतरी जिले बल्कि पूरे प्रदेश में अपनी अलग पहचान बना रहा है।
जहां एक ओर दुनिया त्योहारों के लिए कैलेंडर का अनुसरण करती है, वहीं सेमरा सी गांव परंपरा और आस्था के आधार पर अपने पर्व मनाता है। यही वजह है कि यह गांव समय से पहले नहीं, बल्कि विश्वास के आधार पर त्योहार मनाने की अपनी अनूठी परंपरा को आज भी जीवित रखे हुए है।
Author: Khabri Chai
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