
राज्य के पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री ने अपने विभाग के दो साल का रिपोर्ट कार्ड पेश करते हुए ग्रामीण ढांचे में तेज सुधार का दावा किया है। मंत्री के अनुसार, खासकर नक्सल प्रभावित इलाकों में सड़क निर्माण कार्यों ने रफ्तार पकड़ी है, जिससे दूरस्थ गांवों की कनेक्टिविटी बेहतर हुई है और स्थानीय लोगों को आवागमन में सुविधा मिली है।
रिपोर्ट कार्ड में बताया गया कि पिछले दो वर्षों में बड़ी संख्या में ग्रामीण सड़कों का निर्माण और उन्नयन किया गया। कई ऐसे गांव, जो बरसात के दिनों में कट जाते थे, अब ऑल-वेदर सड़कों से जुड़े हैं। मंत्री ने कहा कि सड़क पहुंचने से सिर्फ आवागमन ही नहीं, बल्कि स्वास्थ्य, शिक्षा और बाजार तक पहुंच भी आसान हुई है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिली है।
सबसे अहम घोषणा सड़क मेंटेनेंस को लेकर रही। मंत्री ने बताया कि अब सड़कों की गुणवत्ता और रखरखाव पर निगरानी के लिए सैटेलाइट तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। इसके जरिए सड़क की स्थिति, टूट-फूट और मरम्मत की जरूरत पर नियमित नजर रखी जाएगी। अधिकारियों का दावा है कि इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और समय पर मरम्मत संभव हो सकेगी।

मंत्री ने यह भी कहा कि नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में विकास कार्य करना चुनौतीपूर्ण होता है, लेकिन सुरक्षा बलों और स्थानीय प्रशासन के सहयोग से काम तेजी से आगे बढ़ाया गया है। कई परियोजनाएं ऐसी हैं जो पहले वर्षों तक लंबित थीं, अब धरातल पर दिख रही हैं।
हालांकि विपक्ष ने रिपोर्ट कार्ड पर सवाल उठाते हुए कहा कि जमीनी स्तर पर कई सड़कों की गुणवत्ता संतोषजनक नहीं है और कई जगह काम अधूरा है। इस पर मंत्री का कहना है कि सरकार गुणवत्ता से समझौता नहीं करेगी और जहां शिकायतें मिलेंगी, वहां जांच कर कार्रवाई होगी।
ग्रामीणों की नजर अब इस बात पर है कि सैटेलाइट निगरानी और नए दावों का असर जमीनी हकीकत में कितना दिखता है। आने वाले समय में ही साफ होगा कि यह रिपोर्ट कार्ड सिर्फ आंकड़ों तक सीमित है या वास्तव में गांवों की तस्वीर बदल रही है।
Author: Khabri Chai
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