
केंद्र सरकार ने बढ़ती महंगाई और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के बीच बड़ा फैसला लेते हुए पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी में ₹10-₹10 की कटौती की है। इस फैसले के बाद पेट्रोल पर लगने वाली एक्साइज ड्यूटी घटकर ₹3 प्रति लीटर रह गई है, जबकि डीजल पर यह पूरी तरह समाप्त होकर शून्य हो गई है।
सरकार का यह कदम ऐसे समय पर आया है जब वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में भारी बढ़ोतरी देखी जा रही है। इजराइल-ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण ब्रेंट क्रूड की कीमत 73 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर 105 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई है। इस तेजी का सीधा असर भारत जैसे आयात पर निर्भर देशों पर पड़ता है।
दरअसल, पिछले कुछ समय से तेल कंपनियां महंगे कच्चे तेल की खरीद कर रही थीं, लेकिन उन्होंने घरेलू बाजार में पेट्रोल-डीजल के दाम नहीं बढ़ाए थे। इससे कंपनियों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा था। रिपोर्ट्स के मुताबिक, कंपनियां पेट्रोल पर करीब ₹24 प्रति लीटर और डीजल पर ₹30 प्रति लीटर तक का घाटा झेल रही थीं।
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सरकार की इस टैक्स कटौती का उद्देश्य आम जनता को सीधे राहत देना नहीं, बल्कि तेल कंपनियों पर बढ़ते वित्तीय दबाव को कम करना है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि इस फैसले के बावजूद आम उपभोक्ताओं को तुरंत ₹10 प्रति लीटर की राहत मिलने की संभावना कम है। इसका कारण यह है कि भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतें सीधे सरकार तय नहीं करतीं, बल्कि इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम जैसी कंपनियां अंतरराष्ट्रीय कीमतों और अपने मार्जिन के आधार पर रेट तय करती हैं।
इसी बीच प्राइवेट कंपनियों ने भी अपने स्तर पर कीमतों में बढ़ोतरी शुरू कर दी है। उदाहरण के तौर पर, नायरा एनर्जी ने हाल ही में पेट्रोल ₹5 और डीजल ₹3 प्रति लीटर महंगा कर दिया, जिससे साफ है कि बाजार पर दबाव लगातार बना हुआ है।

आगे चलकर पेट्रोल-डीजल की कीमतें किस दिशा में जाएंगी, यह पूरी तरह से वैश्विक हालात पर निर्भर करेगा। यदि वेस्ट एशिया में तनाव और बढ़ता है और सप्लाई बाधित होती है, तो कच्चे तेल की कीमतों में और उछाल आ सकता है। ऐसी स्थिति में सरकार द्वारा की गई यह कटौती केवल एक ‘कुशन’ के रूप में काम करेगी।
वहीं, इस फैसले से केंद्र सरकार के राजस्व पर भी असर पड़ेगा। एक्साइज ड्यूटी में कमी का मतलब है कि सरकार को कम टैक्स मिलेगा। अब सबकी नजर राज्य सरकारों पर है कि क्या वे भी वैट (VAT) में कटौती करेंगी। अगर राज्य सरकारें टैक्स घटाती हैं, तो उपभोक्ताओं को पेट्रोल-डीजल के दाम में ₹2 से ₹5 तक की वास्तविक राहत मिल सकती है।
Author: Khabri Chai
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