फसल बिके बिना उजड़ा परिवार: किसान की मजबूरी ने रुकवाई भाई की शादी, कलेक्ट्रेट में फूटा दर्द!

 

 

छत्तीसगढ़ में धान खरीदी व्यवस्था को लेकर एक बार फिर किसानों की बदहाली सामने आई है। धान नहीं बिकने से परेशान एक किसान को अपने ही भाई की शादी रद्द करनी पड़ी। आर्थिक तंगी और कर्ज के बोझ से टूट चुके किसान ने कलेक्ट्रेट पहुंचकर प्रशासन के सामने अपनी पीड़ा रखी और न्याय नहीं मिलने पर आत्मदाह की चेतावनी तक दे डाली।

किसान ने बताया कि उसने शासन की धान खरीदी नीति पर भरोसा कर पूरी मेहनत से फसल तैयार की थी, लेकिन महीनों बीत जाने के बाद भी उसका धान नहीं खरीदा गया। धान बिक्री से मिलने वाले पैसों से ही उसने भाई की शादी तय की थी, लेकिन भुगतान न होने के कारण शादी की सभी तैयारियां अधूरी रह गईं और अंततः विवाह रद्द करना पड़ा।

कलेक्ट्रेट परिसर में किसान भावुक हो गया। उसने कहा कि घर की आर्थिक हालत इतनी खराब हो चुकी है कि रोजमर्रा का खर्च चलाना भी मुश्किल हो गया है। शादी रद्द होने से परिवार को सामाजिक अपमान का सामना करना पड़ा है। किसान ने आरोप लगाया कि कई बार समिति, तहसील और अधिकारियों के चक्कर लगाने के बावजूद उसकी समस्या का समाधान नहीं हुआ।

किसान ने प्रशासन से तत्काल धान खरीदी कराने और लंबित भुगतान जारी करने की मांग की। उसने साफ शब्दों में कहा कि अगर जल्द न्याय नहीं मिला तो उसके पास आत्मदाह जैसे कठोर कदम के अलावा कोई रास्ता नहीं बचेगा। किसान की यह चेतावनी सुनकर कलेक्ट्रेट परिसर में हड़कंप मच गया।

मामले की जानकारी मिलते ही प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे और किसान को समझाइश दी। अधिकारियों ने आश्वासन दिया कि उसकी शिकायत की जांच कर जल्द समाधान किया जाएगा। वहीं, किसान संगठनों ने इस घटना को शासन की धान खरीदी व्यवस्था की विफलता बताया है।

किसान संगठनों का कहना है कि राज्य में कई किसान ऐसे हैं जिनका धान अब तक नहीं खरीदा गया है या भुगतान अटका हुआ है। इससे किसान कर्ज में डूबते जा रहे हैं और परिवारिक जिम्मेदारियां निभाना मुश्किल हो गया है। संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन तेज किया जाएगा।

यह मामला न सिर्फ प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है, बल्कि किसानों की मानसिक और आर्थिक स्थिति की गंभीर तस्वीर भी पेश करता है। अब देखना होगा कि प्रशासन इस किसान की पीड़ा को कितनी गंभीरता से लेता है और धान खरीदी संकट का समाधान कब तक करता है।

Khabri Chai
Author: Khabri Chai

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