मजदूरी से कारोबार तक का सफर: कबीरधाम की महिला ने रचा सफलता का नया इतिहास

मेहनत, आत्मविश्वास और सही मार्गदर्शन मिलने पर साधारण परिस्थितियों में जीवनयापन कर रही महिलाएं भी सफलता की नई ऊंचाइयों तक पहुंच सकती हैं। इसका उदाहरण कबीरधाम जिले के जनपद पंचायत कवर्धा अंतर्गत ग्राम मटका की निवासी श्रीमती ज्योति वैष्णव हैं, जिन्होंने स्व-सहायता समूह से जुड़कर न केवल अपनी आर्थिक स्थिति सुधारी बल्कि गांव की अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणा बन गईं।

कुछ वर्ष पहले तक ज्योति वैष्णव का जीवन संघर्षों से भरा हुआ था। परिवार की आय का मुख्य साधन मजदूरी था, जिससे घर का खर्च चलाना और बच्चों की पढ़ाई कराना काफी कठिन हो जाता था। आर्थिक तंगी के कारण उन्हें कई परेशानियों का सामना करना पड़ता था। इसी दौरान उन्हें गांव में संचालित “जय माँ वैभव लक्ष्मी महिला स्व-सहायता समूह” के बारे में जानकारी मिली। समूह की गतिविधियों और महिलाओं को मिल रहे आर्थिक अवसरों से प्रेरित होकर उन्होंने समूह से जुड़ने का निर्णय लिया।

समूह से जुड़ने के बाद ज्योति वैष्णव ने नियमित बचत की शुरुआत की और आजीविका से जुड़ी गतिविधियों में भाग लेने लगीं। समूह के माध्यम से उन्हें विभिन्न योजनाओं के तहत आर्थिक सहायता भी प्राप्त हुई। समूह को चक्रीय निधि के रूप में 4 हजार रुपये तथा सामुदायिक निवेश कोष के रूप में 15 हजार रुपये की सहायता मिली। इसके अतिरिक्त बैंक से 1 लाख रुपये का ऋण मिलने से उन्हें स्वयं का व्यवसाय शुरू करने का अवसर प्राप्त हुआ।

प्राप्त राशि का उपयोग करते हुए ज्योति वैष्णव ने दोना-पत्तल निर्माण और किराना दुकान का कार्य शुरू किया। धीरे-धीरे उनका दोना-पत्तल निर्माण व्यवसाय आगे बढ़ने लगा और गांव के साथ-साथ आसपास के क्षेत्रों में भी उनके उत्पादों की मांग बढ़ गई। अपनी मेहनत और लगन से उन्होंने इस छोटे से व्यवसाय को आय का स्थायी साधन बना लिया।

आज ज्योति वैष्णव के परिवार की आर्थिक स्थिति पहले से काफी बेहतर हो चुकी है। खेती, दोना-पत्तल निर्माण, किराना दुकान और अन्य कार्यों से उनके परिवार की कुल वार्षिक आय लगभग 1 लाख 35 हजार रुपये तक पहुंच गई है।

ज्योति वैष्णव का कहना है कि स्व-सहायता समूह से जुड़ने के बाद उनके जीवन में बड़ा बदलाव आया है। आत्मविश्वास बढ़ा है और अब गांव में उन्हें सम्मान की दृष्टि से देखा जाता है। आज वे न केवल अपने परिवार को आर्थिक रूप से सशक्त बना रही हैं बल्कि गांव की अन्य महिलाओं को भी आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित कर रही हैं।

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Author: Khabri Chai

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