मनरेगा से बदली किसान की किस्मत: आजीविका डबरी बनी आय और सिंचाई का सहारा

जिले के लोरमी विकासखंड के ग्राम पंचायत औराबांधा में जल संरक्षण और ग्रामीण आजीविका को सशक्त बनाने की दिशा में एक छोटी लेकिन प्रभावी पहल ने बड़ा बदलाव लाया है। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत किसान किशन सिंह के खेत में निर्मित “आजीविका डबरी” अब जल संरक्षण, सिंचाई और मत्स्य पालन का सशक्त माध्यम बनकर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान कर रही है। यह पहल न केवल किसानों की आय बढ़ाने में सहायक साबित हो रही है, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन और कृषि उत्पादन में भी महत्वपूर्ण योगदान दे रही है।

ग्राम औराबांधा निवासी किसान किशन सिंह ने बताया कि पहले उनके खेत में सिंचाई के लिए पानी की गंभीर समस्या बनी रहती थी। वर्षा पर निर्भरता के कारण फसल उत्पादन प्रभावित होता था और कई बार खेती में नुकसान भी उठाना पड़ता था। लेकिन आजीविका डबरी के निर्माण के बाद खेत में वर्षभर पानी उपलब्ध रहने लगा है। इससे सिंचाई की सुविधा बेहतर हुई है और किसान अब खरीफ के साथ-साथ रबी फसल लेने के लिए भी आश्वस्त हैं। साथ ही डबरी में मछली पालन शुरू करने की योजना से अतिरिक्त आय का स्थायी स्रोत विकसित हो रहा है, जिससे परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत हो रही है।

जिला प्रशासन के मार्गदर्शन में यह पहल ग्रामीण आजीविका संवर्धन और जल संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। कलेक्टर कुन्दन कुमार और जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी प्रभाकर पाण्डेय के निर्देशन में जिले में आजीविका डबरी निर्माण कार्यों को प्राथमिकता के साथ क्रियान्वित किया जा रहा है। इस योजना के तहत स्वीकृत 1.94 लाख रुपये की लागत से किशन सिंह के खेत में डबरी का निर्माण कराया गया, जिससे ग्रामीण विकास के साथ-साथ रोजगार के अवसर भी सृजित हुए।

डबरी निर्माण के दौरान कुल 792 मानव दिवस का रोजगार सृजित हुआ। इससे स्थानीय मजदूरों को गांव में ही काम मिला और रोजगार के लिए पलायन की प्रवृत्ति में कमी आई। योजना के माध्यम से ग्रामीणों को आर्थिक संबल मिलने के साथ ही जल संरक्षण के प्रति जागरूकता भी बढ़ी है। विशेषज्ञों के अनुसार इस प्रकार की संरचनाएं वर्षा जल संचयन और भू-जल स्तर को बनाए रखने में सहायक होती हैं, जिससे कृषि उत्पादन में दीर्घकालिक सुधार संभव होता है।

निर्मित डबरी अब खेतों के लिए जीवनदायिनी साबित हो रही है। वर्षा जल संचयन और भू-जल रिचार्ज के माध्यम से सिंचाई सुविधा सुनिश्चित हुई है, जिससे फसल उत्पादन में वृद्धि की संभावना बढ़ गई है। पहले जहां पानी की कमी के कारण खेती सीमित हो जाती थी, वहीं अब किसान बहुफसली खेती की ओर अग्रसर हो रहे हैं। इससे कृषि उत्पादकता बढ़ने के साथ-साथ ग्रामीण आय में भी वृद्धि हो रही है।

जिले में आजीविका संवर्धन के उद्देश्य से इस तरह की पहल को व्यापक स्तर पर लागू किया जा रहा है। वर्ष 2025-26 के लिए जिले में कुल 285 आजीविका डबरी निर्माण कार्य स्वीकृत किए गए हैं। इनमें से 218 कार्यों का निर्माण शुरू हो चुका है, जबकि 20 कार्य पूर्ण किए जा चुके हैं। शेष निर्माण कार्यों को मार्च 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। प्रशासन का मानना है कि इन योजनाओं के सफल क्रियान्वयन से जल संरक्षण, कृषि विकास, पशुपालन और मत्स्य पालन जैसे क्षेत्रों को एकीकृत कर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को स्थायित्व प्रदान किया जा सकेगा।

ग्रामीण क्षेत्रों में आजीविका डबरी जैसी योजनाएं किसानों के लिए बहुआयामी लाभ लेकर आ रही हैं। जल संरक्षण के साथ-साथ यह पहल किसानों को आत्मनिर्भर बनाने, रोजगार के अवसर बढ़ाने और गांवों की आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। प्रशासन की यह पहल ग्रामीण विकास के क्षेत्र में एक सकारात्मक मॉडल के रूप में उभर रही है, जिससे आने वाले समय में जिले के अधिक से अधिक किसान लाभान्वित हो सकेंगे।

Khabri Chai
Author: Khabri Chai

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