रायपुर: छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में आज एक बड़े सांस्कृतिक और शैक्षणिक अध्याय की शुरुआत हुई। राज्यपाल रमेन डेका की पहल पर पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय में महान संत, समाज सुधारक और सांस्कृतिक चेतना के प्रणेता श्रीमंत शंकरदेव के विचारों और दर्शन को समर्पित ‘शोध पीठ’ का भव्य लोकार्पण गरिमामय समारोह में संपन्न हुआ।
सांस्कृतिक सेतु की स्थापना
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए राज्यपाल श्री रमेन डेका ने कहा कि यह शोध पीठ उत्तर-पूर्वी भारत और मध्य भारत की सांस्कृतिक विरासत को शोध (Research) के स्तर पर जोड़ने की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल है। उन्होंने कहा, “श्रीमंत शंकरदेव ने समाज सुधारक, कलाकार, नाटककार और वैष्णव धर्म के प्रचारक के रूप में जो ख्याति अर्जित की, वह आज भी समाज को जोड़ने और मानवीय मूल्यों को सुदृढ़ करने की प्रेरणा देती है।”
‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’ का संकल्प
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने इस अवसर पर कहा कि शंकरदेव जी का कार्यक्षेत्र भले ही असम था, लेकिन उनके सामाजिक जागरण का प्रभाव संपूर्ण देश पर पड़ा। उन्होंने आगे कहा, “500 वर्ष पहले उन्होंने ‘एक भारत’ का जो संदेश दिया था, उसे आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’ के माध्यम से साकार कर रहे हैं।” मुख्यमंत्री ने इस शोध पीठ के सफल संचालन हेतु वर्तमान वित्तीय वर्ष में 2 करोड़ रुपये की राशि प्रदान करने की घोषणा की।
विचारों की कार्यशाला बनेगा संस्थान
उच्च शिक्षा मंत्री श्री टंकराम वर्मा ने अपने संबोधन में कहा कि श्रीमंत शंकरदेव ने शिक्षा को केवल साक्षरता तक सीमित न रखकर उसे संस्कार और संस्कृति से जोड़ा। उन्होंने विश्वास जताया कि यह संस्थान केवल एक भवन नहीं, बल्कि विचारों की एक जीवंत कार्यशाला बनेगा।
विविधता में एकता का संदेश
मुख्य वक्ता डॉ. कृष्ण गोपाल (सह-सरकार्यवाह, RSS) ने असम की भौगोलिक और जनजातीय विविधता का उल्लेख करते हुए बताया कि कैसे हजारों वर्षों से दूर-दराज के क्षेत्रों में निवास करने वाली जनजातियों को शंकरदेव जी ने एकता के सूत्र में पिरोया था।
उपस्थिति: इस अवसर पर शिक्षा जगत के विद्वान, शोधार्थी, युवा वर्ग और बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। विश्वविद्यालय के लिए यह शोध पीठ भविष्य में राष्ट्रीय स्तर पर शोध और अकादमिक चर्चाओं का मुख्य केंद्र बनेगी।
Author: Khabri Chai
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