
छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से एक बेहद संवेदनशील और चिंताजनक मामला सामने आया है, जिसने नशामुक्ति केंद्रों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पंडरी मोवा स्थित ‘साहस नशा मुक्ति केंद्र’ में एक आदिवासी युवक के साथ कथित तौर पर बर्बरता की गई। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें युवक को पाइप से बेरहमी से पीटते हुए देखा जा सकता है।
जानकारी के मुताबिक, युवक को उसके परिजनों ने नशे की लत छुड़ाने के उद्देश्य से इस केंद्र में भर्ती कराया था। लेकिन इलाज के नाम पर उसके साथ अमानवीय व्यवहार किया गया। आरोप है कि केंद्र की संचालिका के बेटे ने युवक को पाइप से पीटा, जिससे उसकी पीठ और गर्दन पर गहरे जख्म हो गए। वीडियो में युवक दर्द से तड़पता नजर आ रहा है, जो इस पूरे मामले की गंभीरता को दर्शाता है।
इस घटना ने कई अहम सवाल खड़े किए हैं—क्या नशामुक्ति केंद्रों में इस तरह की हिंसा आम है? क्या इन केंद्रों की कोई नियमित मॉनिटरिंग होती है? विशेषज्ञों के अनुसार, नशामुक्ति केंद्रों को चिकित्सकीय और मनोवैज्ञानिक सहायता का केंद्र होना चाहिए, न कि शारीरिक प्रताड़ना का।
सूत्रों के अनुसार, मामला सामने आने के बाद पुलिस ने जांच शुरू कर दी है और आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की बात कही जा रही है। पीड़ित युवक का इलाज भी कराया जा रहा है। यदि आरोप साबित होते हैं, तो यह न केवल मानवाधिकारों का उल्लंघन है बल्कि आपराधिक कृत्य भी है।
यह घटना समाज के लिए एक चेतावनी है कि नशा मुक्ति के नाम पर चल रहे संस्थानों की सख्ती से निगरानी जरूरी है, ताकि किसी भी व्यक्ति के साथ इस तरह की क्रूरता दोबारा न हो।
Author: Khabri Chai
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