
11 फरवरी को व्हाइट हाउस में हुई एक बेहद गोपनीय बैठक ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल मचा दी। इस बैठक में डोनाल्ड ट्रम्प और बेंजामिन नेतन्याहू के बीच ईरान को लेकर रणनीतिक चर्चा हुई, जिसे अब एक संभावित सैन्य कार्रवाई के नजरिए से देखा जा रहा है।
सूत्रों के अनुसार, नेतन्याहू बिना किसी औपचारिक कार्यक्रम के सीधे व्हाइट हाउस पहुंचे। मीडिया से बचने के लिए उनकी एंट्री को पूरी तरह गुप्त रखा गया। पहले कैबिनेट रूम में शुरुआती बातचीत हुई, लेकिन असली चर्चा सिचुएशन रूम में हुई—वह जगह जहां अमेरिका के सबसे बड़े सैन्य और सुरक्षा फैसले लिए जाते हैं।
इस बैठक की खास बात यह रही कि आमतौर पर बैठक की अध्यक्षता करने वाले ट्रम्प इस बार टेबल के हेड पर नहीं, बल्कि साइड में बैठे नजर आए। इससे संकेत मिला कि बैठक को एक अलग रणनीतिक माहौल देने की कोशिश की गई थी। बैठक के दौरान एक बड़ी स्क्रीन पर मोसाद के प्रमुख डेविड बार्निया और इजराइली सैन्य अधिकारी लाइव जुड़े हुए थे, जिससे नेतन्याहू की प्रस्तुति और प्रभावशाली बन गई।
नेतन्याहू ने लगभग एक घंटे का विस्तृत प्रेजेंटेशन देते हुए ट्रम्प को समझाने की कोशिश की कि ईरान पर हमला करने का यह सबसे उपयुक्त समय है। उन्होंने दावा किया कि ईरान की सरकार इस समय कमजोर स्थिति में है और अगर अमेरिका तथा इजराइल मिलकर कार्रवाई करें तो उसकी सैन्य क्षमताओं को जल्दी खत्म किया जा सकता है।

उन्होंने यह भी कहा कि ईरान के मिसाइल सिस्टम को कुछ ही हफ्तों में निष्क्रिय किया जा सकता है और सरकार इतनी कमजोर हो जाएगी कि वह होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को बंद नहीं कर पाएगी। इसके अलावा, उन्होंने ईरान के भीतर बढ़ते असंतोष और संभावित विरोध प्रदर्शनों का भी जिक्र किया, जो सरकार के खिलाफ बड़ा आंदोलन बन सकते हैं।
बैठक में अमेरिका के कई शीर्ष अधिकारी मौजूद थे, जिनमें विदेश मंत्री मार्को रूबियो, रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ, सीआईए प्रमुख जॉन रैटक्लिफ और जॉइंट चीफ्स के चेयरमैन जनरल डैन केन शामिल थे। हालांकि उपराष्ट्रपति जेडी वेंस इस बैठक में शामिल नहीं हो पाए, क्योंकि वे उस समय विदेश दौरे पर थे। रिपोर्ट्स के मुताबिक, वेंस इस तरह की सैन्य कार्रवाई के पक्ष में नहीं थे।
नेतन्याहू ने अपनी रणनीति में यह भी संकेत दिया कि इराक के कुर्द लड़ाकों की मदद से ईरान में एक और मोर्चा खोला जा सकता है, जिससे वहां की सरकार पर दबाव बढ़ेगा। साथ ही, उन्होंने संभावित नेतृत्व परिवर्तन की स्थिति में विकल्प भी पेश किए, जिनमें रजा पहलवी का नाम प्रमुख रूप से सामने आया।

इस पूरी बैठक ने यह साफ कर दिया कि ईरान को लेकर अमेरिका और इजराइल के बीच रणनीतिक समन्वय लगातार गहरा हो रहा है। हालांकि किसी भी सैन्य कार्रवाई का अंतिम निर्णय कई जटिल अंतरराष्ट्रीय समीकरणों पर निर्भर करेगा, लेकिन यह बैठक भविष्य की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
Author: Khabri Chai
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