
रायपुर।
छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाले से जुड़े मामले में पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा आज शुक्रवार, 6 फरवरी को प्रवर्तन निदेशालय (ED) की विशेष अदालत में पेश होंगे। करीब एक साल से अधिक समय तक जेल में रहने के बाद उन्हें हाल ही में सशर्त जमानत मिली है। जमानत के बाद यह उनकी पहली कोर्ट पेशी मानी जा रही है, जिस पर राजनीतिक और कानूनी हलकों की नजरें टिकी हुई हैं।
प्रवर्तन निदेशालय ने कवासी लखमा को मनी लॉन्ड्रिंग निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत गिरफ्तार किया था। एजेंसी का आरोप है कि आबकारी विभाग में मंत्री रहते हुए उन्होंने शराब कारोबार से जुड़े एक संगठित नेटवर्क को संरक्षण दिया। जांच में दावा किया गया है कि इस कथित सिंडिकेट के जरिए राज्य को करोड़ों रुपये के राजस्व का नुकसान हुआ और अवैध कमाई को अलग-अलग तरीकों से खपाया गया।

ED के मुताबिक, शराब नीति और लाइसेंस प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं के चलते एक समानांतर सिस्टम विकसित हुआ, जिससे सरकारी खजाने को सीधा नुकसान पहुंचा। एजेंसी ने इस मामले में कई दस्तावेज, बैंक लेनदेन और डिजिटल सबूत जुटाने का दावा किया है।
लंबी न्यायिक प्रक्रिया के बाद अदालत ने कवासी लखमा को सशर्त जमानत दी है। जमानत आदेश में स्पष्ट शर्तें रखी गई हैं। कोर्ट ने निर्देश दिया है कि वे जांच एजेंसी के साथ पूरा सहयोग करेंगे, किसी भी गवाह या सबूत को प्रभावित नहीं करेंगे और अदालत की अनुमति के बिना राज्य से बाहर नहीं जाएंगे।

आज की सुनवाई के दौरान ED की ओर से अदालत के समक्ष केस की प्रगति रिपोर्ट और आगे की जांच की स्थिति रखी जा सकती है। इसके साथ ही, कोर्ट यह भी देखेगी कि जमानत की शर्तों का पालन किया जा रहा है या नहीं।
गौरतलब है कि ED ने कवासी लखमा को 15 जनवरी 2025 को गिरफ्तार किया था। गिरफ्तारी के बाद उन्हें एजेंसी की रिमांड पर लेकर करीब 7 दिनों तक पूछताछ की गई। इसके बाद उन्हें न्यायिक रिमांड पर भेज दिया गया था और वे रायपुर सेंट्रल जेल में बंद रहे। लगभग 379 दिन जेल में बिताने के बाद 4 फरवरी को उन्हें जमानत मिली।
राजनीतिक दृष्टि से यह मामला बेहद संवेदनशील माना जा रहा है। विपक्ष इसे बड़े घोटाले का उदाहरण बता रहा है, जबकि कांग्रेस इसे राजनीतिक प्रतिशोध करार देती रही है। आने वाले दिनों में इस केस की सुनवाई और जांच की दिशा पर सभी की नजर बनी रहेगी।
Author: Khabri Chai
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