
नई दिल्ली, 29 जनवरी 2026: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 पेश किया, जिसे आम तौर पर “देश का आर्थिक रिपोर्ट कार्ड” कहा जाता है। बजट सत्र से पहले पेश किए गए इस रिपोर्ट में रोजगार, आर्थिक वृद्धि और प्रमुख आर्थिक संकेतकों का विस्तृत लेखा-जोखा शामिल है। सर्वे के आधार पर अगले वित्त वर्ष 2026-27 (FY27) में भारत की GDP ग्रोथ 6.8% से 7.2% के बीच रहने का अनुमान है, जो वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच अर्थव्यवस्था की स्थिरता और मजबूती को दर्शाता है।
सर्वे में यह भी सामने आया है कि वित्त वर्ष 2025-26 की दूसरी तिमाही (Q2) में लगभग 56.2 करोड़ लोगों के पास रोजगार था, जो पहली तिमाही की तुलना में करीब 8.7 लाख से अधिक नौकरियों की बढ़त को दर्शाता है। यह आंकड़ा भारत के श्रम बाजार में रोजगार सृजन की निरंतरता का संकेत देता है।
आर्थिक सर्वेक्षण में महंगाई, निवेश, उपभोग और निर्यात जैसे सभी महत्वपूर्ण क्षेत्रों का विश्लेषण किया गया है। चालू वित्त वर्ष 2025-26 में GDP ग्रोथ का अनुमान 7.4% तक है, जबकि अगले वित्त वर्ष के अनुमान में थोड़ी कमी आ सकती है, लेकिन स्थिर वृद्धि बनी रहने की उम्मीद जताई गई है।

रिपोर्ट में लेबर मार्केट के बदलाव और रोजगार के अवसरों के सुधार पर भी जोर दिया गया है। डिजिटलाइजेशन, गिग इकोनॉमी और श्रम कानूनों के सुधारों के कारण बेरोज़गारी दर में कमी और श्रम शक्ति भागीदारी में बढ़ोतरी शामिल है। इसके अलावा, महिला श्रम भागीदारी में भी उल्लेखनीय वृद्धि देखने को मिली है, जो आर्थिक गतिविधियों में महिलाओं की भागीदारी को दर्शाती है।

आर्थिक सर्वेक्षण में Labour Codes को रोजगार सृजन और श्रमिक सुरक्षा के लिहाज़ से एक बड़ा कदम बताया गया है। गिग और प्लेटफ़ॉर्म वर्कर्स को औपचारिक मान्यता मिलना, सामाजिक सुरक्षा कवरेज का विस्तार और श्रमिक वेलफेयर को मजबूत करना इसमें शामिल हैं।
विश्लेषकों का कहना है कि यह आर्थिक सर्वे सरकार की नीतियों और आर्थिक दिशा का मंच है, जो बजट 2026-27 के निर्णयों में मार्गदर्शक भूमिका निभाएगा। रोजगार के क्षेत्र में सकारात्मक रुझान और निरंतर GDP वृद्धि के अनुमान से यह स्पष्ट होता है कि भारत की अर्थव्यवस्था स्थिरता की ओर अग्रसर है, भले ही वैश्विक परिस्थितियाँ चुनौतिपूर्ण बनी हुई हों।
Author: Khabri Chai
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