
रायपुर, 10 फरवरी 2026।
मुख्यमंत्री सामूहिक कन्या विवाह योजना के राज्य स्तरीय आयोजन में आज सामाजिक समरसता और सर्वधर्म सद्भाव की अनूठी मिसाल देखने को मिली। बौद्ध धर्म की परंपराओं के अनुरूप छह नवदंपत्तियों ने मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के सान्निध्य में वैवाहिक जीवन में प्रवेश कर जीवनभर साथ निभाने का संकल्प लिया। इस आयोजन ने करुणा, समानता और मानवीय मूल्यों के संदेश को सशक्त रूप से प्रस्तुत किया।
मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के तहत आयोजित इस कार्यक्रम में बौद्ध धर्म के अनुयायी जोड़ों का विवाह पारंपरिक बौद्ध रीति-रिवाजों के साथ संपन्न हुआ। बौद्धाचार्य भंते श्री ओमप्रकाश सहारे ने बताया कि विवाह से पूर्व महाकारुणिक भगवान गौतम बुद्ध और भारत रत्न बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर की प्रतिमाओं पर माल्यार्पण किया गया। इसके पश्चात नवदंपत्तियों ने त्रिशरण और पंचशील ग्रहण किए तथा धम्म वंदना, बुद्ध वंदना और संघ वंदना के साथ जयमंगल अष्टगाथा का पाठ किया गया। जयमाला के माध्यम से सभी जोड़ों ने एक-दूसरे को जीवनसाथी के रूप में स्वीकार किया।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय, महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े और कौशल विकास मंत्री गुरु खुशवंत साहेब ने मंच से उतरकर प्रत्येक नवदंपत्ति को व्यक्तिगत रूप से आशीर्वाद दिया और उनके सुखी, समृद्ध और सफल दांपत्य जीवन की कामना की। मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना का मूल उद्देश्य सभी वर्गों, समुदायों और धर्मों के परिवारों को सम्मानजनक ढंग से विवाह का अवसर उपलब्ध कराना है, जिससे समाज में समानता, भाईचारा और सौहार्द मजबूत हो।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह योजना न केवल आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को सहयोग प्रदान करती है, बल्कि सामाजिक एकता और धार्मिक सहिष्णुता को भी बढ़ावा देती है। बौद्ध परंपरा के अनुसार संपन्न हुए इन विवाहों ने समावेशी और संवेदनशील शासन की सोच को स्पष्ट रूप से दर्शाया है।
इस सामूहिक विवाह समारोह में डोंगरगढ़ की आँचल टेम्बुलकर–आकाश इंदुलकर, छुरिया (राजनांदगांव) की देवनतीन–कृष्णा विजय शहरे, आकांक्षा रावत–अक्षय कोसरे, अंजली गेड़ाम–प्रताप कुमार, सुधा मेश्राम–अंकुश वासनिक तथा अर्चना गेड़ाम के विवाह बौद्ध परंपराओं के अनुसार संपन्न हुए।
मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के अंतर्गत हुआ यह आयोजन सामाजिक समानता, धार्मिक समरसता और समावेशी छत्तीसगढ़ की भावना को और अधिक सशक्त करता है।
Author: Khabri Chai
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