
सोशल मीडिया पर एक बार फिर से एक वायरल वीडियो ने लोगों का ध्यान खींचा है। इस बार मामला है “आरोही” नामक सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर से जुड़ा एक 3-मिनट का MMS वीडियो। वीडियो तेजी से व्हाट्सएप, इंस्टाग्राम और अन्य प्लेटफॉर्म्स पर साझा किया जा रहा है। हालांकि वीडियो के वायरल होने के साथ ही विशेषज्ञों और अधिकारियों ने चेतावनी जारी की है कि यह ठगी और गलत प्रचार का हिस्सा हो सकता है।
मीडिया रिपोर्ट्स और साइबर विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह के वायरल MMS या वीडियो आमतौर पर दर्शकों की जिज्ञासा और उत्सुकता का फायदा उठाकर उन्हें झूठी जानकारी और प्रलोभन की ओर आकर्षित करते हैं। कई बार ऐसे वीडियो लोगों से निजी जानकारी, बैंक डिटेल्स या ऑनलाइन पेमेंट करने के लिए दबाव डालते हैं। विशेषज्ञों ने साफ़ कहा है कि बिना पुष्टि किए किसी भी वायरल वीडियो को साझा करना खतरनाक हो सकता है और यह न केवल आपकी सुरक्षा बल्कि दूसरों की सुरक्षा के लिए भी जोखिम पैदा कर सकता है।

इस मामले में, अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि आरोही के नाम का इस्तेमाल कर बना यह वीडियो वास्तविक नहीं हो सकता। उन्होंने आम जनता से अपील की है कि सोशल मीडिया पर वायरल किसी भी सामग्री को शेयर करने से पहले उसकी प्रामाणिकता जरूर जांचें। साथ ही, साइबर सेल और पुलिस ने लोगों को सजग रहने और संदिग्ध लिंक या संदेश पर क्लिक न करने की सलाह दी है।
विशेषज्ञों का कहना है कि वायरल वीडियो और MMS का मुख्य उद्देश्य लोगों का ध्यान आकर्षित करना और उन्हें धोखाधड़ी या गलत प्रचार के जाल में फंसाना है। इसलिए सोशल मीडिया यूजर्स को चाहिए कि वे किसी भी ऐसी सामग्री को बिना पुष्टि किए न फैलाएं और अपने परिवार और दोस्तों को भी जागरूक करें।
अंत में यह कहा जा सकता है कि सोशल मीडिया पर वायरल कंटेंट के पीछे हमेशा सच नहीं होता। सावधानी और जानकारी ही सुरक्षा की सबसे बड़ी गारंटी है।
Author: Khabri Chai
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