राज्य ब्यूरो, रायपुर। छत्तीसगढ़ स्टेट इलेक्ट्रिसिटी रेग्युलेटरी कमीशन (सीएसईआरसी) ने प्रदेश की बिजली कंपनियों द्वारा प्रस्तुत वार्षिक राजस्व आवश्यकता (ARR) और टैरिफ निर्धारण से जुड़ी याचिकाओं पर सार्वजनिक सुनवाई की सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं। आयोग द्वारा यह जनसुनवाई फरवरी माह में ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से आयोजित की जाएगी, ताकि अधिक से अधिक उपभोक्ताओं और हितधारकों की भागीदारी सुनिश्चित की जा सके।
आयोग के अनुसार, 17 और 18 फरवरी को प्रदेश के छह प्रमुख क्षेत्रों में ऑनलाइन माध्यम से जनसुनवाई आयोजित की जाएगी। इसके बाद 19 और 20 फरवरी को राजधानी रायपुर में ऑफलाइन जनसुनवाई होगी। इन सुनवाइयों में आम उपभोक्ता, उद्योग प्रतिनिधि, सामाजिक संगठन और अन्य हितधारक बिजली दरों और निवेश योजनाओं पर अपने सुझाव और आपत्तियां रख सकेंगे।
राज्य की चारों बिजली कंपनियों—छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड (CSPDCL), छत्तीसगढ़ स्टेट पावर जनरेशन कंपनी लिमिटेड (CSPGCL), छत्तीसगढ़ स्टेट पावर ट्रांसमिशन कंपनी लिमिटेड (CSPTCL) और छत्तीसगढ़ स्टेट लोड डिस्पैच सेंटर (CSLDC)—ने वित्तीय वर्ष 2026-27 से 2029-30 तक के लिए अपने-अपने कैपिटल इन्वेस्टमेंट प्लान और टैरिफ याचिकाएं आयोग के समक्ष प्रस्तुत की हैं।

इन याचिकाओं में बिजली उत्पादन, ट्रांसमिशन और वितरण से जुड़े ढांचे को सुदृढ़ करने की योजनाओं का विस्तृत रोडमैप शामिल किया गया है। कंपनियों ने नेटवर्क विस्तार, तकनीकी उन्नयन, लाइन लॉस में कमी, नई परियोजनाओं और उपभोक्ताओं को बेहतर आपूर्ति सुनिश्चित करने से जुड़े प्रस्ताव पेश किए हैं। इसके साथ ही आने वाले वर्षों में अनुमानित खर्च, राजस्व आवश्यकता और संभावित टैरिफ संरचना का भी उल्लेख किया गया है।
स्टेट इलेक्ट्रिसिटी रेग्युलेटरी कमीशन ने इन सभी याचिकाओं का विवरण अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर सार्वजनिक कर दिया है, ताकि आमजन पहले से दस्तावेजों का अध्ययन कर सकें और जनसुनवाई के दौरान तथ्यों के आधार पर अपनी राय रख सकें। आयोग ने उपभोक्ताओं से अपील की है कि वे सुनवाई में भाग लेकर बिजली दरों और योजनाओं से जुड़े मुद्दों पर अपनी बात रखें।
आयोग का कहना है कि जनसुनवाई के दौरान प्राप्त सुझावों और आपत्तियों पर गंभीरता से विचार करने के बाद ही टैरिफ निर्धारण और निवेश योजनाओं पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा। इस प्रक्रिया का उद्देश्य बिजली क्षेत्र में पारदर्शिता बनाए रखना और उपभोक्ता हितों की रक्षा करना है।
Author: Khabri Chai
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