100 साल की विचारधारा पर बनी ‘शतक’ — क्या फिल्म देती है इतिहास के सवालों का जवाब?

फिल्म की कहानी डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार के शुरुआती जीवन से शुरू होकर माधव सदाशिव गोलवलकर के दौर तक पहुंचती है। इसमें संगठन की स्थापना, विस्तार और विभिन्न ऐतिहासिक घटनाओं में उसकी भूमिका को दर्शाने का प्रयास किया गया है। फिल्म कई महत्वपूर्ण पड़ावों को क्रमबद्ध तरीके से दिखाती है, जिससे दर्शकों को एक लंबी ऐतिहासिक यात्रा की झलक मिलती है।

हालांकि फिल्म का नैरेटिव एक खास दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ता नजर आता है। कई विवादित और जटिल पहलुओं को सीमित रूप से प्रस्तुत किया गया है। उदाहरण के तौर पर महात्मा गांधी की हत्या का उल्लेख तो किया गया है, लेकिन उससे जुड़े कई महत्वपूर्ण सवालों और बहसों को विस्तार से नहीं दिखाया गया। गांधी हत्या के बाद लगे प्रतिबंध जैसे ऐतिहासिक घटनाक्रमों को भी संक्षेप में प्रस्तुत कर कहानी आगे बढ़ा दी जाती है। इससे विषय की गहराई और बहस का पूरा आयाम सामने नहीं आ पाता।

फिल्म की गति काफी तेज है, जिसके कारण कई बड़े घटनाक्रम जल्दी-जल्दी गुजरते हैं। फिल्म दर्शकों को सूचनाएं अधिक देती है, लेकिन भावनात्मक ठहराव कम महसूस होता है। कलाकारों ने संयमित और गंभीर अभिनय किया है। हेडगेवार और गोलवलकर के किरदार प्रभावशाली नजर आते हैं और फिल्म की गंभीर टोन के अनुरूप रहते हैं। ओवरड्रामैटिक प्रस्तुति से बचना फिल्म की प्रमुख विशेषता है।

हालांकि तेज रफ्तार के कारण पात्रों का मानवीय पक्ष सीमित रह जाता है। कई जगह पात्र विचारधारा के प्रतिनिधि ज्यादा और व्यक्ति कम लगते हैं, जिससे दर्शक उनके साथ भावनात्मक रूप से पूरी तरह जुड़ नहीं पाते।

निर्देशन और तकनीकी पहलू:

निर्देशक आशीष मॉल का निर्देशन नियंत्रित और स्पष्ट है। फिल्म अपने उद्देश्य से भटकती नहीं और विषय को गंभीरता के साथ प्रस्तुत करती है। CGI और VFX का व्यापक उपयोग कई दृश्यों को भव्य बनाता है और ऐतिहासिक कालखंड को प्रस्तुत करने में मदद करता है।

हालांकि कुछ जगह तकनीकी प्रस्तुति अत्यधिक सजी-संवरी लगती है, जिससे उस दौर की वास्तविकता का प्रभाव थोड़ा कम हो जाता है। सेट और लोकेशन कई बार कृत्रिम महसूस होते हैं। लगातार संवाद और घटनाओं की तेज गति फिल्म को कुछ हिस्सों में डॉक्यूमेंट्री या लेक्चर जैसा अनुभव देती है।

संगीत और बैकग्राउंड स्कोर:

फिल्म का बैकग्राउंड स्कोर कहानी के गंभीर माहौल को बनाए रखने में सहायक है। संगीत कहानी पर हावी नहीं होता और दृश्यों के साथ संतुलन बनाए रखता है। हालांकि ऐसा कोई खास संगीत क्षण नहीं है जो लंबे समय तक दर्शकों की स्मृति में बना रहे।

फाइनल वर्डिक्ट:

‘शतक’ एक महत्वाकांक्षी और ईमानदार सिनेमाई प्रयास है, जो एक बड़े ऐतिहासिक विषय को सम्मानपूर्वक प्रस्तुत करने की कोशिश करता है। फिल्म अपने उद्देश्य में स्पष्ट है, लेकिन तेज रफ्तार और सीमित दृष्टिकोण के कारण विषय की पूरी गहराई सामने नहीं आ पाती। इतिहास और विचारधारा में रुचि रखने वाले दर्शकों के लिए यह फिल्म एक जानकारीपूर्ण अनुभव हो सकती है, लेकिन सिनेमाई प्रभाव और भावनात्मक जुड़ाव के लिहाज से इसका असर सीमित रह जाता है।

Khabri Chai
Author: Khabri Chai

Khabri Chai news portal.

Advertisement Carousel