Khabri Chai Desk :- छत्तीसगढ़ में चल रहे सुशासन तिहार का तीसरा चरण शरू हो चूका हैं इसका असर अब राज्य के सुदूर और वनांचल क्षेत्रों में भी नज़र आने लगा है। विकासखंड कसडोल के आदिवासी बहुल ग्राम बल्दाकछार में रहने वाले टिकेश्वर प्रसाद की कहानी इसी बदलाव की मिसाल बन गई है।
9 मई को जब मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय का हेलीकॉप्टर अचानक बल्दाकछार में उतरा, तो गांव की गलियों में अचानक हलचल बढ़ी और ग्रामीणों ने अपने मुख्यमंत्री का गर्मजोशी से स्वागत किया।
मुख्यमंत्री ने गांव में रुककर लोगों की समस्याएं सुनीं और मौके पर ही कई दिशा-निर्देश भी दिए। इसी दौरान कमार जनजाति से ताल्लुक रखने वाले टिकेश्वर ने उनसे अपनी आर्थिक स्थिति साझा की और परिवार के भरण-पोषण के लिए नौकरी की इच्छा जाहिर की।

मुख्यमंत्री साय ने संवेदनशीलता दिखाते हुए तुरंत कलेक्टर श्री दीपक सोनी को आवश्यक कदम उठाने का निर्देश दिया। इसके बाद कलेक्टर ने कार्रवाई करते हुए टिकेश्वर को शासकीय पोस्ट मैट्रिक अनुसूचित जाति बालक छात्रावास, कसडोल में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के पद पर नियुक्त किया।
बांस की टोकनी से सरकारी नौकरी तक का सफर
टिकेश्वर का परिवार परंपरागत रूप से बांस से बनी वस्तुएं जैसे टोकनी, सूपा, पर्रा आदि बनाकर आजीविका चला रहा था। 12वीं तक पढ़ाई पूरी करने के बाद टिकेश्वर भी इसी काम में माता-पिता का साथ दे रहा था। लेकिन कम आमदनी के चलते जीवन कठिन था।
अब, सरकारी सेवा में प्रवेश पाकर टिकेश्वर को न केवल स्थायी आय का स्रोत मिला है, बल्कि वह अपने माता-पिता के लिए एक मजबूत सहारा भी बन गया है। नौकरी मिलने के बाद टिकेश्वर ने मुख्यमंत्री और जिला प्रशासन के प्रति आभार व्यक्त किया और कहा कि अब उसका जीवन नई दिशा में आगे बढ़ रहा है।
Author: Khabri Chai
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