
रायपुर। सरकारी बैंकों में *5‑डे वर्किंग सिस्टम* लागू करने की मांग को लेकर देशभर के साथ‑साथ छत्तीसगढ़ में भी बैंक कर्मचारी हड़ताल पर चले गए हैं। राज्य में करीब *2500 से अधिक सरकारी बैंक कर्मचारी* इस आंदोलन में शामिल हैं, जिसके चलते बैंकों में ताले लटके रहे और आम ग्राहकों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। राजधानी रायपुर में बैंक कर्मचारियों ने *मोतीबाग के पास जोरदार प्रदर्शन* कर अपनी मांगों को लेकर सरकार और बैंक प्रबंधन के खिलाफ नारेबाजी की।
हड़ताल का असर इसलिए भी ज्यादा देखने को मिला, क्योंकि इससे पहले *शनिवार, रविवार और सोमवार* को लगातार अवकाश था। लगातार छुट्टियों और अब हड़ताल के कारण बैंकिंग सेवाएं ठप हो गई हैं। नकद लेन‑देन, चेक क्लियरेंस, ड्राफ्ट, पासबुक एंट्री और अन्य काउंटर सेवाएं पूरी तरह प्रभावित रहीं। कई उपभोक्ता बैंक शाखाओं के बाहर पहुंचकर बंद दरवाजे देखकर निराश लौटते नजर आए।

बैंक कर्मचारी संगठनों का कहना है कि देश के कई सरकारी विभागों में पहले से ही *सप्ताह में 5‑दिवसीय कार्य प्रणाली* लागू है, लेकिन बैंक कर्मियों को अब भी 6‑डे वर्किंग करना पड़ रहा है। उनका तर्क है कि बढ़ते कार्यभार, डिजिटल ट्रांजेक्शन के दबाव और स्टाफ की कमी के चलते कर्मचारियों पर मानसिक और शारीरिक तनाव बढ़ रहा है। ऐसे में 5‑डे वर्किंग सिस्टम लागू करना समय की मांग है।
प्रदर्शन के दौरान कर्मचारियों ने केंद्र सरकार और बैंक प्रबंधन से जल्द निर्णय लेने की अपील की। यूनियन नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर जल्द विचार नहीं किया गया, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। कर्मचारियों ने यह भी कहा कि वे ग्राहकों की परेशानी समझते हैं, लेकिन अपनी जायज मांगों के लिए मजबूरन हड़ताल का रास्ता अपनाना पड़ा है।
वहीं, बैंक प्रबंधन की ओर से फिलहाल कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। हालांकि, डिजिटल बैंकिंग सेवाएं जैसे एटीएम, यूपीआई और ऑनलाइन ट्रांजेक्शन सामान्य रूप से चालू रहे, जिससे कुछ हद तक राहत मिली।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि हड़ताल लंबी चली, तो इसका असर व्यापार, छोटे कारोबारियों और आम जनता पर और ज्यादा पड़ेगा। फिलहाल सभी की नजरें सरकार और बैंक प्रबंधन के अगले कदम पर टिकी हुई हैं, जिससे जल्द समाधान निकल सके।
Author: Khabri Chai
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