बस्तर। विश्व प्रसिद्ध बस्तर दशहरा की तैयारियां अब जोर पकड़ने लगी हैं। करीब 75 दिनों तक चलने वाले इस अनूठे पर्व के सबसे महत्वपूर्ण आयोजनों में शामिल रथ निर्माण के लिए पवित्र लकड़ी जुटाने का काम शुरू हो गया है। बस्तर की पारंपरिक मान्यताओं और रस्मों के अनुसार जंगल से साल के पेड़ों की लकड़ी चिन्हित कर उसे रथ निर्माण के लिए शहर लाया जा रहा है।
बस्तर दशहरा के रथ निर्माण से जुड़ी तैयारियों की तस्वीरें भी सामने आई हैं। ‘ठुरलू खोटला’ रस्म के तहत पवित्र पेड़ का तना काटने के बाद रथ के लिए जरूरी साल की लकड़ी जुटाई जा रही है। यह प्रक्रिया केवल निर्माण कार्य नहीं, बल्कि बस्तर की सदियों पुरानी लोक परंपरा और धार्मिक आस्था का अहम हिस्सा मानी जाती है।
माचकोट और दरभा के जंगलों से लाई जा रही लकड़ी
रथ निर्माण के लिए माचकोट और दरभा क्षेत्र के जंगलों से चिन्हित पेड़ों की लकड़ी शहर पहुंचाई जा रही है। लकड़ी की कटाई और परिवहन की पूरी प्रक्रिया राजस्व एवं वन विभाग के कर्मचारियों की मौजूदगी में की जा रही है।
रथ के निर्माण के लिए लकड़ी की मजबूती और गुणवत्ता का विशेष ध्यान रखा जाता है। परंपरा के अनुसार निर्धारित प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही इस लकड़ी का इस्तेमाल बस्तर दशहरा के रथ निर्माण में किया जाता है।
पारंपरिक शिल्पकार तैयार करेंगे दो मंजिला रथ
लकड़ी शहर पहुंचने के बाद बस्तर के पारंपरिक रथ शिल्पकार निर्माण की जिम्मेदारी संभालेंगे। झारउमरगांव और बेड़ाउमरगांव के पारंपरिक कारीगरों के पहुंचने के बाद दो मंजिला लकड़ी के रथ का निर्माण शुरू होगा।
बस्तर दशहरा का रथ अपने आकार, निर्माण शैली और पारंपरिक तकनीक के कारण देशभर में अलग पहचान रखता है। इसे तैयार करने में स्थानीय शिल्पकारों की पीढ़ियों से चली आ रही कला और अनुभव का इस्तेमाल किया जाता है।
75 दिनों तक चलता है बस्तर दशहरा
बस्तर दशहरा देश के सबसे लंबे समय तक चलने वाले दशहरा उत्सवों में से एक है। इसकी शुरुआत जुलाई महीने में पाट जात्रा पूजा के साथ हुई थी। इसके बाद अलग-अलग पारंपरिक रस्मों और धार्मिक आयोजनों का सिलसिला चलता है।
इस पूरे पर्व में बस्तर की आदिवासी संस्कृति, परंपराएं, देवी-देवताओं में आस्था और सदियों पुरानी लोक मान्यताएं देखने को मिलती हैं। पर्व का समापन 27 अक्टूबर को मां मावली और मां दंतेश्वरी की विदाई के साथ होगा।
रथ सिर्फ वाहन नहीं, बस्तर की संस्कृति का प्रतीक
बस्तर दशहरा का रथ यहां की सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण प्रतीक है। इसे तैयार करने से लेकर रथ खींचने तक की पूरी प्रक्रिया में स्थानीय परंपराओं और धार्मिक मान्यताओं का पालन किया जाता है।
जंगल से पवित्र लकड़ी लाने की शुरुआत के साथ ही अब बस्तर में दशहरा उत्सव का माहौल और अधिक जीवंत होने लगा है। आने वाले दिनों में पारंपरिक कारीगरों की मौजूदगी में रथ निर्माण का काम तेजी से आगे बढ़ेगा।
Author: Khabri Chai
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