रायपुर।
छत्तीसगढ़ में डिजिटल क्रॉप सर्वे और शत-प्रतिशत गिरदावरी की सटीकता सुनिश्चित करने के लिए राज्य सरकार ने निगरानी तेज कर दी है। खेतों में वास्तव में बोई गई फसलों और सरकारी रिकॉर्ड के बीच किसी तरह की विसंगति न रहे, इसके लिए अब सर्वे में दर्ज जानकारी का मौके पर सत्यापन कराया जाएगा। मुख्य सचिव विकासशील ने शुक्रवार को मंत्रालय महानदी भवन में आयोजित समीक्षा बैठक में अधिकारियों को राज्यस्तरीय टीमें गठित कर विभिन्न जिलों में फील्ड वेरिफिकेशन कराने के निर्देश दिए।

बैठक में डिजिटल क्रॉप सर्वे की प्रगति, भूमि अभिलेखों की स्थिति और फसलों के वास्तविक क्षेत्रफल से जुड़े रिकॉर्ड की समीक्षा की गई। मुख्य सचिव ने स्पष्ट किया कि सर्वे का उद्देश्य खेतों में बोई गई फसलों का सटीक डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करना है। इसलिए सर्वे में दर्ज जानकारी का राजस्व अभिलेखों और वास्तविक स्थिति से मिलान करना जरूरी है।
खेतों में जाकर होगा फसलों का सत्यापन
मुख्य सचिव विकासशील ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जिन खसरों में फसल बोए जाने की जानकारी दर्ज है, उनकी वास्तविक स्थिति की जांच की जाए। मौके पर यह देखा जाएगा कि संबंधित भूमि पर खेती हो रही है या नहीं और सर्वे में दर्ज फसल की जानकारी सही है या नहीं।
जहां खेती की जा रही है, वहां निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार पॉलीगॉन बनाकर फसल संबंधी जानकारी दर्ज करने पर जोर दिया गया। डिजिटल क्रॉप सर्वे के तहत खेतों की भौगोलिक स्थिति और फसल से संबंधित विवरण को डिजिटल रूप में दर्ज किया जाता है। इससे कृषि भूमि और बोई गई फसलों का अधिक व्यवस्थित रिकॉर्ड तैयार करने में मदद मिलती है।
राज्यस्तरीय टीमें करेंगी क्रॉस वेरिफिकेशन
सर्वे की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए राज्यस्तर पर विशेष टीमें गठित कर जिलों में फील्ड वेरिफिकेशन कराया जाएगा। इन टीमों को सर्वे में दर्ज आंकड़ों का मौके पर सत्यापन कर विस्तृत रिपोर्ट तैयार करनी होगी।
रिपोर्ट में यह जानकारी दर्ज की जाएगी कि कितने खसरों की जांच की गई, कितने रिकॉर्ड सही पाए गए और किन स्थानों पर गलतियां या विसंगतियां सामने आईं। जहां रिकॉर्ड में त्रुटियां मिलेंगी, वहां निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार सुधार करने के निर्देश दिए गए हैं।
इस व्यवस्था का उद्देश्य डिजिटल सर्वे की विश्वसनीयता बढ़ाने के साथ यह सुनिश्चित करना है कि सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज जानकारी वास्तविक कृषि स्थिति के अनुरूप हो।
धान की खेती और खरीदी के आंकड़ों का होगा मिलान
बैठक में धान की खेती, किसान पंजीयन और धान उपार्जन से जुड़े आंकड़ों के तुलनात्मक परीक्षण पर भी जोर दिया गया। मुख्य सचिव ने अधिकारियों से कहा कि अलग-अलग विभागों के रिकॉर्ड का आपस में मिलान किया जाए, ताकि किसी भी तरह की विसंगति सामने आने पर समय रहते उसका निराकरण किया जा सके।
इस प्रक्रिया में डिजिटल क्रॉप सर्वे में दर्ज फसल संबंधी जानकारी की तुलना किसान पंजीयन और धान खरीदी से जुड़े रिकॉर्ड से की जाएगी। यदि किसी क्षेत्र में दर्ज आंकड़ों में अंतर मिलता है, तो संबंधित रिकॉर्ड की जांच कर आवश्यक सुधार किए जाएंगे।
यह प्रक्रिया इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि फसल का सटीक रिकॉर्ड कृषि योजनाओं की निगरानी, सरकारी खरीदी की तैयारी और किसानों से संबंधित प्रशासनिक कार्यों में उपयोगी होता है।
नक्शों की तकनीकी त्रुटियां दूर करेगा राजस्व विभाग
डिजिटल क्रॉप सर्वे के दौरान नक्शों की अनुपलब्धता और तकनीकी समस्याओं का मुद्दा भी बैठक में उठा। मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि ऐसी समस्याओं के कारण सर्वे का काम अनावश्यक रूप से लंबित नहीं रहना चाहिए।
राजस्व विभाग को नक्शों से जुड़ी त्रुटियों को दूर करने के लिए तकनीकी समाधान तलाशने और जरूरत के अनुसार नक्शों को अद्यतन करने की कार्ययोजना तैयार करने को कहा गया। जिन मामलों में भौतिक सत्यापन या पॉलीगॉन सत्यापन की आवश्यकता है, उन्हें निर्धारित प्रक्रिया के तहत पूरा करने पर भी जोर दिया गया।
कलेक्टरों के साथ बैठक कर होगी समीक्षा
मुख्य सचिव ने राजस्व विभाग के अधिकारियों को सभी जिलों के कलेक्टरों के साथ बैठक कर डिजिटल क्रॉप सर्वे की प्रगति की समीक्षा करने के निर्देश दिए। जिला स्तर पर गांवों और खेतों से जुड़े रिकॉर्ड का सत्यापन कर कमियों को दूर करने के लिए समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
इसके साथ ही विभिन्न विभागों के बीच समन्वय बढ़ाने और सर्वे की नियमित निगरानी करने पर जोर दिया गया, ताकि निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार कार्य पूरा किया जा सके।
बैठक में वरिष्ठ अधिकारी रहे मौजूद
मंत्रालय महानदी भवन में आयोजित बैठक में मुख्यमंत्री एवं ऊर्जा विभाग के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग की सचिव रीना बाबा साहब कंगाले, कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के सचिव सिद्धार्थ कोमल परदेशी, राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग की सचिव शम्मी आबिदी, संचालक उद्योग प्रभात मलिक, संचालक भू-अभिलेख विनीत नंदनवार और संचालक खाद्य फरिया आलम सिद्दीकी सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
किसानों और धान खरीदी व्यवस्था के लिए क्यों अहम है यह सर्वे?
डिजिटल क्रॉप सर्वे में फसलों और कृषि भूमि का सटीक रिकॉर्ड तैयार होने से सरकारी आंकड़ों की विश्वसनीयता बढ़ सकती है। धान की खेती, किसान पंजीयन और उपार्जन के आंकड़ों का मिलान होने से रिकॉर्ड में मौजूद कमियों की पहचान करने में भी मदद मिल सकती है।
अब राज्यस्तरीय टीमों के सत्यापन और जिला प्रशासन की समीक्षा के बाद यह स्पष्ट होगा कि सर्वे में कितनी विसंगतियां सामने आती हैं और उन्हें दूर करने के लिए क्या कार्रवाई की जाती है।
Author: Khabri Chai
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