धमतरी सुसाइड केस में कोर्ट का बड़ा फैसला, पत्नी समेत 5 दोषियों को 5-5 साल की जेल

धमतरी। छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले में लिनेश साहू आत्महत्या मामले में अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। युवक की मौत से जुड़े मामले में उसकी पत्नी, सास-ससुर और दो सालियों समेत पांच लोगों को दोषी ठहराते हुए पांच-पांच साल के कारावास की सजा सुनाई गई है। इसके अलावा सभी दोषियों पर 500-500 रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। मामले में आत्महत्या के लिए उकसाने से संबंधित भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 108 के तहत कार्रवाई की गई।

करीब दो साल पुराने इस मामले में आत्महत्या से पहले लिनेश के मोबाइल फोन पर दर्ज WhatsApp स्टेटस और अन्य साक्ष्य जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा बने। लिनेश ने अपने स्टेटस में पत्नी और ससुराल पक्ष के लोगों पर मानसिक रूप से परेशान करने और ईसाई धर्म अपनाने के लिए दबाव बनाने के आरोप लगाए थे। अदालत के फैसले के बाद यह मामला एक बार फिर चर्चा में है।

घर में फंदे पर लटका मिला था लिनेश का शव

मामला धमतरी जिले के अर्जुनी थाना क्षेत्र के पोटियाडीह गांव का है। यहां रहने वाला 30 वर्षीय लिनेश साहू टेलरिंग का काम करता था। उसकी शादी रायपुर निवासी करुणा साहू से हुई थी। बताया गया कि शादी के शुरुआती दिनों में दोनों का वैवाहिक जीवन सामान्य था। इस दौरान उनके एक बच्चे का जन्म भी हुआ।

हालांकि, बाद में पति-पत्नी के बीच विवाद बढ़ने लगे। परिजनों की शिकायत और पुलिस जांच के दौरान आरोप सामने आए कि लिनेश पर धर्म परिवर्तन करने के लिए दबाव बनाया जा रहा था। इसी बीच 7 दिसंबर 2024 को लिनेश ने अपने घर में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली।

घटना की जानकारी मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू की। जांच के दौरान लिनेश के मोबाइल फोन में मौजूद WhatsApp स्टेटस और संदेशों की पड़ताल की गई। इन संदेशों में उसने अपनी पत्नी और ससुराल पक्ष के लोगों से परेशान होने की बात लिखी थी।

आत्महत्या से पहले WhatsApp स्टेटस पर बयां किया था दर्द

लिनेश ने अपने WhatsApp स्टेटस में पत्नी पर ईसाई धर्म अपनाने के लिए दबाव बनाने का आरोप लगाया था। उसके संदेशों के मुताबिक, उसे बार-बार ईसा मसीह का नाम लेकर धर्म परिवर्तन करने के लिए कहा जाता था।

उसने यह भी आरोप लगाया था कि जब वह ससुराल जाता था, तब उसकी सास और दोनों सालियां भी उस पर धर्म परिवर्तन का दबाव बनाती थीं। कथित तौर पर उससे कहा जाता था कि पहले वह ईसाई धर्म अपना ले, इसके बाद उसके माता-पिता को भी इसके लिए तैयार कर लिया जाएगा।

लिनेश ने अपने स्टेटस में यह भी लिखा था कि इन परिस्थितियों के कारण उसने ससुराल में खाना तक नहीं खाया था। ये बातें उसके द्वारा लगाए गए आरोपों का हिस्सा थीं, जिनकी पुलिस ने जांच के दौरान अन्य साक्ष्यों के साथ पड़ताल की।

शादी से पहले जानकारी छिपाने का भी लगाया था आरोप

लिनेश ने अपने संदेशों में शादी से पहले पत्नी की शिक्षा और धर्म से जुड़ी जानकारी छिपाए जाने का आरोप भी लगाया था। उसका दावा था कि पत्नी की पढ़ाई के बारे में उसे जो जानकारी दी गई थी, वह बाद में अलग निकली। उसने यह भी आरोप लगाया था कि शादी से पहले पत्नी के ईसाई धर्म से जुड़े होने की जानकारी उसे नहीं दी गई थी।

इसके अलावा, लिनेश ने अपनी कमाई और पारिवारिक व्यवहार को लेकर भी शिकायत जताई थी। उसके मुताबिक, वह हफ्तेभर में जितनी कमाई करता था, वह अपनी पत्नी को दे देता था, लेकिन इसके बावजूद उसके साथ अच्छा व्यवहार नहीं किया जाता था।

बच्चे से दूर रखने का भी लगाया था आरोप

मामले में सामने आए आरोपों में यह बात भी शामिल थी कि धर्म परिवर्तन नहीं करने के कारण लिनेश को अपने बच्चे से दूर रखा जाता था। परिजनों की शिकायत के अनुसार, युवक मानसिक रूप से परेशान था और पारिवारिक परिस्थितियों से जूझ रहा था।

पुलिस ने जांच के दौरान उसके मोबाइल फोन से मिले डिजिटल साक्ष्यों के साथ अन्य उपलब्ध सबूतों की भी पड़ताल की। इसके बाद पत्नी और ससुराल पक्ष के चार अन्य सदस्यों के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने से संबंधित मामला अदालत तक पहुंचा।

पत्नी, सास-ससुर और दो सालियों को सजा

मामले में सरकारी वकील गीतेश प्रजापति के मुताबिक, अदालत ने पांचों आरोपियों को दोषी ठहराते हुए प्रत्येक को पांच-पांच साल के कारावास और 500-500 रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई है।

इस फैसले के तहत लिनेश की पत्नी, सास, ससुर और दोनों सालियों को दंडित किया गया है। हालांकि, फैसले से संबंधित विस्तृत न्यायिक आदेश और आरोपों पर अदालत की विशिष्ट टिप्पणियों की जानकारी उपलब्ध होने पर मामले के कानूनी पहलुओं को और स्पष्ट रूप से समझा जा सकता है।

जांच में डिजिटल साक्ष्य बने अहम कड़ी

लिनेश साहू की मौत के बाद उसके मोबाइल फोन में मिले WhatsApp स्टेटस और संदेश जांच का अहम हिस्सा बने। आत्महत्या से पहले लिखे गए संदेशों में उसने जिन परिस्थितियों का उल्लेख किया था, वे पुलिस की जांच में शामिल किए गए। पुलिस ने उपलब्ध डिजिटल साक्ष्यों और अन्य सबूतों के आधार पर कार्रवाई की, जिसके बाद अदालत ने पांच लोगों को दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई।

धमतरी का यह मामला कथित मानसिक प्रताड़ना, पारिवारिक विवाद और धर्म परिवर्तन के दबाव जैसे गंभीर आरोपों के कारण चर्चा में रहा है। अदालत के फैसले के बाद एक बार फिर यह मामला सुर्खियों में आ गया है।

Khabri Chai
Author: Khabri Chai

Khabri Chai news portal.

Advertisement Carousel