छत्तीसगढ़ के शहरों को मिलेगा विकास का नया आधार, ₹1 लाख करोड़ के अर्बन चैलेंज फंड पर CM साय का जोर

रायपुर। छत्तीसगढ़ के शहरों को आधुनिक, सुविधासंपन्न और आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने शहरी विकास की दीर्घकालिक योजना पर जोर दिया है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा है कि विकसित भारत और विकसित छत्तीसगढ़ के लक्ष्य को हासिल करने में शहरों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। ऐसे में नगरीय निकायों को वर्तमान समस्याओं के समाधान के साथ आने वाले दशकों की जरूरतों को ध्यान में रखकर विकास परियोजनाएं तैयार करनी होंगी।

अर्बन चैलेंज फंड कॉन्क्लेव : छत्तीसगढ़ के शहर बनेंगे आधुनिक, शहरों में नाव  नहीं, दौड़ेंगी गाड़ियां, सीएम साय का दावा

नवा रायपुर स्थित मेफेयर लेक रिजॉर्ट में आवास एवं शहरी विकास निगम (हुडको) और छत्तीसगढ़ शासन के नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित अर्बन चैलेंज फंड (UCF) एवं अर्बन इन्वेस्ट विंडो (UiWIN) विषयक प्रथम क्षेत्रीय कार्यशाला का मुख्यमंत्री साय ने शुभारंभ किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार के एक लाख करोड़ रुपये के अर्बन चैलेंज फंड का प्रभावी उपयोग प्रदेश के शहरों के विकास के लिए महत्वपूर्ण अवसर साबित हो सकता है।

शहरी विकास के लिए दो महत्वपूर्ण समझौते

कार्यशाला के दौरान नगरीय विकास को मजबूत बनाने और नगरीय निकायों की क्षमता बढ़ाने के उद्देश्य से दो महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापनों (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। पहला समझौता हुडको और छत्तीसगढ़ शासन के नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के बीच हुआ, जबकि दूसरा एमओयू नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग और सेप्ट विश्वविद्यालय के बीच संपन्न हुआ।

इन समझौतों के माध्यम से शहरों में विकास परियोजनाओं की बेहतर योजना बनाने, वित्तीय संसाधन जुटाने, तकनीकी विशेषज्ञता हासिल करने और अधिकारियों एवं नगरीय निकायों को प्रशिक्षण देने में सहयोग मिलने की उम्मीद है। इससे स्थानीय जरूरतों के अनुरूप परियोजनाएं तैयार करने और उनके प्रभावी क्रियान्वयन को बढ़ावा मिल सकता है।

2047 के विकसित छत्तीसगढ़ की तैयारी

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2047 तक विकसित भारत बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इसी दिशा में छत्तीसगढ़ सरकार भी विकसित छत्तीसगढ़ के विजन को साकार करने के लिए काम कर रही है।

उन्होंने कहा कि शहर केवल आबादी के विस्तार का केंद्र नहीं हैं, बल्कि उद्योग, व्यापार, निवेश और रोजगार के प्रमुख आधार भी हैं। इसलिए नगरीय विकास की योजनाएं ऐसी होनी चाहिए, जो नागरिकों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के साथ आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा दें।

मुख्यमंत्री ने नगरीय निकायों से आधुनिक तकनीक, वित्तीय अनुशासन और दीर्घकालिक नियोजन को प्राथमिकता देने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि शहरों का विकास इस तरह होना चाहिए कि बढ़ती आबादी के बावजूद पेयजल, सड़क, बिजली, परिवहन और स्वच्छता जैसी सुविधाओं पर अनावश्यक दबाव न पड़े।

जलभराव और बिजली के तारों की समस्या पर स्थायी समाधान की जरूरत

शहरों में बारिश के दौरान होने वाला जलभराव और सड़कों के ऊपर फैले बिजली व अन्य सेवाओं के तार नागरिकों के लिए बड़ी समस्याएं बनते हैं। मुख्यमंत्री साय ने इन समस्याओं का स्थायी समाधान तलाशने पर जोर दिया।

उन्होंने कहा कि नगरीय निकायों को ऐसी जल निकासी व्यवस्था विकसित करनी चाहिए, जो भविष्य में बढ़ने वाली आबादी और निर्माण गतिविधियों को भी ध्यान में रखे। इसके लिए ड्रेनेज नेटवर्क की समुचित योजना, विभिन्न विभागों के बीच समन्वय और तकनीकी समाधानों का उपयोग जरूरी है।

मुख्यमंत्री ने जहां संभव हो, वहां बिजली और अन्य सेवाओं के तारों को भूमिगत करने की योजनाएं तैयार करने की आवश्यकता भी बताई। इससे शहरों की व्यवस्था बेहतर बनाने, सुरक्षा बढ़ाने और सार्वजनिक स्थानों को व्यवस्थित करने में मदद मिल सकती है।

महापौरों और नगरीय निकायों को दी गई जिम्मेदारी

कार्यशाला में मौजूद महापौरों, नगर पालिका एवं नगर पंचायत अध्यक्षों और अधिकारियों से मुख्यमंत्री ने कहा कि जनता ने उन्हें अपने शहरों के विकास की जिम्मेदारी सौंपी है। इसलिए उन्हें शहरों की वास्तविक जरूरतों और स्थानीय समस्याओं को समझते हुए योजनाएं बनानी चाहिए।

उन्होंने अर्बन चैलेंज फंड के प्रावधानों का गंभीरता से अध्ययन करने और विशेषज्ञों की मदद से तकनीकी तथा आर्थिक रूप से व्यवहार्य परियोजनाएं तैयार करने की सलाह दी।

मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी परियोजना की सफलता केवल उसके निर्माण से तय नहीं होती। उसके संचालन, रखरखाव और वित्तीय प्रबंधन की व्यवस्था भी शुरुआत से तय होनी चाहिए। इससे सरकारी संसाधनों का बेहतर उपयोग होगा और नागरिकों को लंबे समय तक सुविधाओं का लाभ मिल सकेगा।

अरुण साव बोले- शहरों के विकास के लिए बड़ा अवसर है फंड

उप मुख्यमंत्री एवं नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री अरुण साव ने कहा कि भारत सरकार ने अर्बन चैलेंज फंड के लिए एक लाख करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। यह छत्तीसगढ़ के शहरों को नई सुविधाओं से लैस करने और विकास परियोजनाओं को गति देने का महत्वपूर्ण अवसर है।

उन्होंने कहा कि नगरीय निकायों के सामने अब चुनौती गुणवत्तापूर्ण परियोजनाएं तैयार करने और उपलब्ध वित्तीय संसाधनों का अधिकतम लाभ लेने की है। बदलती तकनीक और नागरिकों की अपेक्षाओं के अनुरूप शहरी विकास की कार्यशैली में भी बदलाव जरूरी है।

अरुण साव ने जनप्रतिनिधियों से ऐसे कार्यों को प्राथमिकता देने का आह्वान किया, जिनका लाभ वर्तमान पीढ़ी के साथ आने वाली पीढ़ियों को भी मिले। उन्होंने कहा कि जनता के एक-एक रुपये का सदुपयोग सुनिश्चित करना सभी की जिम्मेदारी है।

केंद्र सरकार की योजनाओं से शहरी सुविधाओं का विस्तार

केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य राज्य मंत्री तोखन साहू ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में शहरी विकास को नई दिशा मिली है। प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी, स्वच्छ भारत मिशन और अमृत मिशन जैसी योजनाओं के माध्यम से आवास, स्वच्छता और बुनियादी सुविधाओं के विस्तार पर काम किया गया है।

उन्होंने कहा कि तेजी से बढ़ते शहरीकरण के कारण पेयजल, आवास, सड़क, परिवहन और स्वच्छता की मांग लगातार बढ़ रही है। इन जरूरतों को पूरा करने के लिए नगरीय निकायों को वित्तीय रूप से मजबूत बनाना जरूरी है।

तोखन साहू ने सरकारी सहायता के साथ बैंक वित्तपोषण, बाजार आधारित संसाधनों और सार्वजनिक-निजी भागीदारी का प्रभावी उपयोग करने पर जोर दिया। उन्होंने जबलपुर में कचरे से ऊर्जा उत्पादन और हैदराबाद में जल प्रबंधन एवं तकनीक आधारित निगरानी जैसी पहलों का उल्लेख करते हुए छत्तीसगढ़ के नगरीय निकायों को सफल प्रयोगों से सीख लेने की सलाह दी।

जनजातीय क्षेत्रों और रेल अधोसंरचना के विकास पर भी जोर

मुख्यमंत्री साय ने प्रदेश में बुनियादी सुविधाओं के विस्तार का उल्लेख करते हुए कहा कि पीएम जनमन योजना के माध्यम से विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों की बसाहटों तक सड़क, बिजली, आवास और पेयजल जैसी सुविधाएं पहुंचाने के प्रयास किए जा रहे हैं। वहीं, धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान से जनजातीय क्षेत्रों के समग्र विकास को गति देने पर जोर दिया जा रहा है।

उन्होंने रेल अधोसंरचना के विस्तार और बस्तर क्षेत्र में संपर्क सुविधाओं को बेहतर बनाने की जरूरत का भी उल्लेख किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ प्राकृतिक और खनिज संपदा से समृद्ध प्रदेश है। विकास और निवेश की संभावनाओं का लाभ उठाने के लिए मजबूत आधारभूत संरचना और बेहतर शहरी नियोजन आवश्यक है।

कार्यशाला में विशेषज्ञों ने दिए सुझाव

कार्यशाला में अर्बन चैलेंज फंड और अर्बन इन्वेस्ट विंडो के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की गई। इसमें वित्तीय संसाधन जुटाने, परियोजनाओं की व्यवहार्यता, आधुनिक शहरी नियोजन और संस्थागत क्षमता बढ़ाने जैसे विषय शामिल रहे।

कार्यक्रम में प्रदेश के 14 नगर निगमों के महापौर, नगर पालिकाओं के अध्यक्ष, नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा, हुडको के सीएमडी संजय कुलश्रेष्ठ, सेप्ट विश्वविद्यालय के प्रेसिडेंट बरजोर मेहता सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी, जनप्रतिनिधि और विशेषज्ञ मौजूद रहे।

क्या बदलेगा छत्तीसगढ़ के शहरों में?

अर्बन चैलेंज फंड के माध्यम से बेहतर परियोजनाएं तैयार कर वित्तीय संसाधन जुटाने में सफलता मिलती है, तो आने वाले समय में शहरों में जल निकासी, सड़क, परिवहन, स्वच्छता और अन्य बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करने के अवसर बढ़ सकते हैं। हालांकि, इसका वास्तविक लाभ इस बात पर निर्भर करेगा कि नगरीय निकाय कितनी प्रभावी और व्यवहार्य परियोजनाएं तैयार करते हैं तथा उनका क्रियान्वयन किस तरह किया जाता है।

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Author: Khabri Chai

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