
नई दिल्ली, 04 फरवरी 2026।
भारत और अमेरिका के बीच हुए व्यापार समझौते का सकारात्मक प्रभाव भारतीय अर्थव्यवस्था पर साफ तौर पर देखने को मिल रहा है। इस समझौते के बाद भारतीय शेयर बाजार में मजबूती दर्ज की गई है, वहीं डॉलर के मुकाबले रुपये में भी स्थिरता और सुधार देखा गया है। अंतरराष्ट्रीय व्यापार को लेकर बनी सकारात्मक धारणा से निवेशकों का भरोसा बढ़ा है और बाजार में उत्साह का माहौल बना हुआ है।
विशेषज्ञों के अनुसार भारत–अमेरिका व्यापार समझौते से दोनों देशों के बीच आयात-निर्यात को बढ़ावा मिलेगा। इससे खासतौर पर आईटी, फार्मा, टेक्सटाइल, कृषि उत्पाद और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को फायदा होने की उम्मीद है। समझौते की खबर के बाद शेयर बाजार में शुरुआती कारोबार के दौरान प्रमुख सूचकांक हरे निशान पर खुले और कई दिग्गज कंपनियों के शेयरों में तेजी देखने को मिली।
विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की सक्रियता में भी इजाफा देखा गया है। बाजार जानकारों का कहना है कि व्यापार समझौते से भारत को वैश्विक निवेश के लिए एक मजबूत और भरोसेमंद गंतव्य के रूप में देखा जा रहा है। इससे आने वाले समय में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) बढ़ने की संभावना है, जो देश की आर्थिक वृद्धि को और मजबूती देगा।

रुपये की स्थिति की बात करें तो अमेरिका के साथ व्यापारिक रिश्तों में मजबूती से भारतीय मुद्रा को भी सहारा मिला है। डॉलर के मुकाबले रुपये में गिरावट पर अंकुश लगा है और मुद्रा बाजार में स्थिरता देखने को मिली है। जानकारों का मानना है कि निर्यात बढ़ने और विदेशी पूंजी के प्रवाह से रुपये की स्थिति और बेहतर हो सकती है।
सरकारी स्तर पर भी इस समझौते को भारत के लिए अहम उपलब्धि माना जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार यह व्यापार समझौता न केवल द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करेगा, बल्कि भारत की आर्थिक विकास दर को भी गति देगा। अमेरिका भारत का एक प्रमुख व्यापारिक साझेदार है और दोनों देशों के बीच बढ़ता सहयोग वैश्विक मंच पर भारत की भूमिका को और सशक्त करेगा।
हालांकि कुछ विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि बाजार की यह तेजी फिलहाल भावनाओं पर आधारित है और आगे इसके वास्तविक लाभ समझौते के क्रियान्वयन पर निर्भर करेंगे। इसके बावजूद कुल मिलाकर भारत–अमेरिका व्यापार समझौते को भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।
Author: Khabri Chai
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