डस्टबिन से कारोबार तक: अंजना उरांव की प्रेरक उड़ान

कभी-कभी ज़िंदगी को नई दिशा देने के लिए न बड़े मंच की ज़रूरत होती है, न बड़े संसाधनों की। कई बार एक मामूली-सा संकेत ही सोच को झकझोर देता है। कोरिया जिले के बैकुंठपुर विकासखंड के ग्राम तोलगा की रहने वाली अंजना उरांव की कहानी ऐसी ही मिसाल है, जहां एक डस्टबिन में मिला कागज़ भविष्य की नींव बन गया।

अंजना उरांव किसी समृद्ध या उद्योगिक पृष्ठभूमि से नहीं आतीं। वे जनपद पंचायत खड़गवां में अंशकालिक डाटा एंट्री ऑपरेटर के रूप में कार्यरत थीं। स्नातकोत्तर शिक्षा प्राप्त होने के बावजूद उन्हें केवल चार हजार रुपये मासिक मानदेय मिलता था। सीमित आय और जिम्मेदारियों के बीच जीवन जैसे एक तय दायरे में सिमट गया था। इसी दौरान कार्यालय की सफाई के समय उन्हें डस्टबिन में पड़ा एक फटा हुआ पन्ना मिला, जिस पर प्रधानमंत्री सृजन स्वरोजगार योजना का उल्लेख था। उस कागज़ ने उनके भीतर कुछ नया करने की चिंगारी जला दी।

योजना की जानकारी लेने पर अंजना को कई तरह की प्रतिक्रियाओं का सामना करना पड़ा। किसी ने बैंक प्रक्रिया को बेवजह की परेशानी बताया, तो किसी ने सामाजिक जोखिम का हवाला देकर उन्हें पीछे हटने की सलाह दी। बावजूद इसके, उनके मन में जिला कलेक्टर श्रीमती चंदन त्रिपाठी का यह संदेश गूंजता रहा कि महिलाएं यदि ठान लें तो किसी भी चुनौती को पार कर सकती हैं। यही विश्वास उन्हें आगे बढ़ाता रहा।

 

जिला व्यापार एवं उद्योग केंद्र से मार्गदर्शन लेने के बाद जब उन्होंने पोड़ी-बचरा क्षेत्र में फ्लाईऐश ईंट निर्माण इकाई का अवलोकन किया, तो उन्होंने इसी क्षेत्र में अपना उद्यम शुरू करने का निर्णय लिया। इसके बाद कागजी कार्रवाई, बैंकों के चक्कर और ऋण स्वीकृति की लंबी प्रक्रिया शुरू हुई। इस कठिन दौर में उनके पति अनिल कुमार उनका मजबूत सहारा बने और उनके सपने को अपना सपना बना लिया।

अंततः एचडीएफसी बैंक, बैकुंठपुर से 30 लाख रुपये का ऋण स्वीकृत हुआ। कटघोरा से मशीनें मंगाई गईं, शेड का निर्माण किया गया और अगस्त 2025 में इकाई का शुभारंभ हुआ। अक्टूबर 2025 से उत्पादन शुरू होते ही अंजना इंटरप्राइजेज फ्लाईऐश ब्रिक्स इकाई ने अपनी पहचान बनानी शुरू कर दी। अब तक लगभग 80 हजार ईंटों का निर्माण हो चुका है और वे हर महीने 60 हजार रुपये की बैंक किश्त समय पर चुका रही हैं।

आज अंजना उरांव न केवल अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को सशक्त कर रही हैं, बल्कि ग्रामीण महिलाओं के लिए प्रेरणा भी बन चुकी हैं। उनकी यात्रा यह साबित करती है कि अवसर अक्सर वहीं छिपे होते हैं, जहां हम देखने की कोशिश नहीं करते। मेहनत, आत्मविश्वास और सही मार्गदर्शन से साधारण शुरुआत भी असाधारण सफलता में बदली जा सकती है।

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Author: Khabri Chai

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