80 देशों के आंकड़ों का बड़ा खुलासा: जेन-जी माता-पिता से कम बुद्धिमान, स्क्रीन ने कुंद की सोच

वॉशिंगटन | 6 फरवरी 2026

दुनिया के 80 देशों के शोध आंकड़ों के विश्लेषण में सामने आया है कि जेन-जी (15 से 27 वर्ष) पहली ऐसी पीढ़ी बन चुकी है, जिसकी बौद्धिक क्षमता अपने माता-पिता की पीढ़ी से कम पाई गई है। यह जानकारी न्यूरोसाइंटिस्ट डॉ. जैरेड कुनी हॉरवाथ ने अमेरिकी सीनेट की एक समिति के समक्ष रखी।

डॉ. हॉरवाथ के अनुसार, 1800 के दशक के उत्तरार्ध के बाद यह पहला मौका है जब किसी पीढ़ी के आईक्यू, मेमोरी, ध्यान क्षमता, पढ़ने-समझने, गणितीय सोच और समस्या सुलझाने की क्षमता में पिछली पीढ़ी की तुलना में गिरावट दर्ज की गई है। उन्होंने इसके पीछे डिजिटल टेक्नोलॉजी और स्क्रीन पर बढ़ती निर्भरता को मुख्य कारण बताया।

उन्होंने कहा कि इंसानी दिमाग छोटे वीडियो, रील्स और संक्षिप्त कंटेंट से सीखने के लिए नहीं बना है। गहराई से पढ़ना, लंबे संवाद और आमने-सामने बातचीत दिमाग के विकास में ज्यादा कारगर होते हैं। वर्ष 2010 के बाद से बच्चों और किशोरों की संज्ञानात्मक क्षमताओं में लगातार गिरावट देखी जा रही है।

एप्लिकेशन आधारित शिक्षा और डिजिटल उपकरणों पर बढ़ती निर्भरता को देखते हुए कई यूरोपीय देशों ने अपने शिक्षा तंत्र में बदलाव शुरू कर दिए हैं। स्वीडन ने स्कूलों में टैबलेट और लैपटॉप हटाकर फिर से कागज-कलम और प्रिंटेड किताबों को प्राथमिकता दी है। फ्रांस, नीदरलैंड्स, ब्रिटेन और फिनलैंड जैसे देशों ने भी स्कूलों में डिजिटल गैजेट्स के इस्तेमाल को सीमित किया है।

यूनेस्को पहले ही चेतावनी दे चुका है कि शिक्षा में तकनीक का अत्यधिक उपयोग तब तक लाभकारी नहीं होता, जब तक वह वास्तविक सीखने में मदद न करे। विशेषज्ञों का मानना है कि बिना नियंत्रण के तकनीक शिक्षा को कमजोर कर सकती है।

डॉ. हॉरवाथ के अनुसार, जेन-जी के युवाओं में अपनी बुद्धिमत्ता को लेकर जरूरत से ज्यादा आत्मविश्वास देखा जा रहा है, जबकि वे अपनी सीमाओं को पहचान नहीं पा रहे हैं। शिक्षा विशेषज्ञों ने इस स्थिति को सामाजिक आपातकाल बताया है।

रिसर्च में यह भी सामने आया कि जो छात्र रोजाना करीब 5 घंटे कंप्यूटर या डिजिटल डिवाइस पर पढ़ाई करते हैं, उनका शैक्षणिक प्रदर्शन उन छात्रों की तुलना में कमजोर होता है, जो तकनीक का सीमित या बिल्कुल इस्तेमाल नहीं करते। जब प्रत्येक छात्र को व्यक्तिगत डिजिटल डिवाइस देने की योजनाएं लागू हुईं, तब शैक्षणिक स्कोर में तेजी से गिरावट दर्ज की गई।

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि समय रहते डिजिटल संतुलन नहीं बनाया गया, तो इसका असर आने वाली पीढ़ियों की सोच, निर्णय-क्षमता और रचनात्मकता पर गहराई से पड़ेगा।

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Author: Khabri Chai

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