राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू पहली बार जगदलपुर आईं, बस्तर पंडुम कार्यक्रम का आज उद्घाटन

 

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू आज पहली बार छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग के दौरे पर जगदलपुर पहुंची हैं। राष्ट्रपति अपने दौरे के दौरान जगदलपुर के लालबाग मैदान में आयोजित बस्तर पंडुम के संभाग स्तरीय कार्यक्रम का शुभारंभ करेंगी। यह कार्यक्रम बस्तर की समृद्ध आदिवासी संस्कृति, परंपरा और लोककलाओं को मंच प्रदान करने के उद्देश्य से आयोजित किया जा रहा है।

राष्ट्रपति के आगमन को लेकर पूरे जगदलपुर शहर में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। जिला प्रशासन और पुलिस विभाग पूरी तरह अलर्ट मोड पर है। राष्ट्रपति के काफिले के मद्देनज़र ट्रैफिक व्यवस्था में अस्थायी बदलाव किए गए हैं और पुलिस द्वारा ट्रैफिक एडवाइजरी भी जारी की गई है। कार्यक्रम स्थल और आसपास के क्षेत्रों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू अपने इस दौरे के दौरान बस्तर की पारंपरिक आदिवासी जीवनशैली, लोकसंस्कृति और कला को नजदीक से देखेंगी। लालबाग मैदान में आयोजित कार्यक्रम के लिए विशाल और भव्य मंच तैयार किया गया है। मंच और पूरे परिसर को आदिवासी प्रतीकों, पारंपरिक रंगों और लोक कला के तत्वों से सजाया गया है, जिससे बस्तर की सांस्कृतिक पहचान को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया जा सके।

बस्तर पंडुम के तहत विभिन्न जनजातियों द्वारा पारंपरिक नृत्य, लोकगीत, वाद्ययंत्र, वेशभूषा और रीति-रिवाजों की प्रस्तुतियां दी जाएंगी। इन प्रस्तुतियों के माध्यम से बस्तर क्षेत्र की सांस्कृतिक विविधता और परंपरागत विरासत को प्रदर्शित किया जाएगा। कार्यक्रम में स्थानीय कलाकारों और जनजातीय समुदाय की सक्रिय भागीदारी रहेगी।

राष्ट्रपति के स्वागत, कार्यक्रम संचालन, सुरक्षा और यातायात व्यवस्था को लेकर प्रशासनिक अमला पूरी तरह मुस्तैद है। जिला स्तर से लेकर संभागीय स्तर तक अधिकारियों को अलग-अलग जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं ताकि कार्यक्रम शांतिपूर्ण और व्यवस्थित तरीके से संपन्न हो सके।

इसी दिन केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह का भी छत्तीसगढ़ दौरा प्रस्तावित है। वे शाम को राजधानी रायपुर पहुंचेंगे। उनके आगमन को लेकर भी प्रशासन द्वारा तैयारियां की जा रही हैं।

राष्ट्रपति का यह दौरा बस्तर के लिए ऐतिहासिक माना जा रहा है, क्योंकि पहली बार देश के सर्वोच्च पद पर आसीन राष्ट्रपति बस्तर की धरती पर पहुंचकर यहां की आदिवासी संस्कृति और परंपरा से सीधे रूबरू होंगी।

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Author: Khabri Chai

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