जगदलपुर।
केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह रविवार को बस्तर पंडुम के समापन समारोह में शामिल होने जगदलपुर पहुंचे। इस दौरान उन्होंने मंच से नक्सलवाद के खिलाफ एक बार फिर सख्त संदेश दिया। शाह ने कहा कि कभी बस्तर का 75 प्रतिशत से अधिक क्षेत्र नक्सल हिंसा की चपेट में था, लेकिन अब हालात पूरी तरह बदल चुके हैं और मुट्ठीभर नक्सली ही बचे हैं। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि नक्सली हथियार छोड़कर मुख्यधारा में नहीं लौटे, तो सुरक्षा बल उन्हें हथियारों से ही जवाब देंगे।
समारोह के दौरान मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और अन्य जनप्रतिनिधियों ने केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह का पारंपरिक तरीके से स्वागत किया और उन्हें बस्तर पंडुम का प्रतीक चिन्ह भेंट किया। मंच पर राज्य सरकार के मंत्री, सांसद, विधायक और प्रशासनिक अधिकारी भी मौजूद रहे। यह कार्यक्रम बस्तर की जनजातीय संस्कृति, कला और परंपराओं को समर्पित रहा है
अमित शाह ने अपने संबोधन में कहा कि केंद्र और राज्य सरकार की संयुक्त रणनीति के चलते बस्तर में नक्सलवाद लगातार कमजोर हुआ है। उन्होंने सुरक्षा बलों की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि जवानों के साहस और सरकार की विकास योजनाओं के कारण आज बस्तर शांति और विकास की ओर बढ़ रहा है। शाह ने नक्सलियों से अपील की कि वे हिंसा का रास्ता छोड़कर आत्मसमर्पण करें और समाज की मुख्यधारा से जुड़ें।
केंद्रीय गृहमंत्री ने कहा कि सरकार आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों के पुनर्वास के लिए ठोस नीति पर काम कर रही है। शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य और सड़क जैसी बुनियादी सुविधाओं के विस्तार से बस्तर में बदलाव साफ दिखाई दे रहा है। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में बस्तर को विकास का मॉडल क्षेत्र बनाया जाएगा।
गौरतलब है कि अमित शाह सालभर में छठवीं बार बस्तर दौरे पर पहुंचे हैं। इससे पहले भी वे कई मंचों से नक्सलवाद के खिलाफ कड़ा रुख अपना चुके हैं। बस्तर पंडुम के मंच से दिया गया उनका यह बयान सरकार की ‘नक्सलवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस’ नीति को दर्शाता है।
कार्यक्रम के समापन पर सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का आयोजन भी किया गया, जिसमें बस्तर की लोक कला और परंपराओं की झलक देखने को मिली। बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक और कलाकार इस आयोजन के साक्षी बने।
Author: Khabri Chai
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