PWD के चीफ इंजीनियर पर गंभीर आरोप: पूर्व गृहमंत्री ननकी राम कंवर ने PM मोदी को पत्र लिखकर CBI जांच मांगी

रायपुर।
छत्तीसगढ़ के पूर्व गृहमंत्री ननकी राम कंवर ने लोक निर्माण विभाग (PWD) के चीफ इंजीनियर विजय कुमार भतपहरी के खिलाफ भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र भेजा है। इस पत्र की प्रतिलिपि राज्य के मुख्य सचिव विकासशील और PWD सचिव कमलप्रीत सिंह को भी भेजी गई है। कंवर ने पूरे मामले की निष्पक्ष और गहन जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) से कराने की मांग की है।

पत्र में ननकी राम कंवर ने आरोप लगाया है कि विजय कुमार भतपहरी ने विभाग में विभिन्न पदों पर रहते हुए नियमों और प्रक्रियाओं की अनदेखी की और अपने प्रभाव का उपयोग कर कुछ चुनिंदा ठेकेदारों को अनुचित लाभ पहुंचाया। उन्होंने कहा है कि कथित कमिशनखोरी के जरिए न केवल सरकारी धन का दुरुपयोग हुआ, बल्कि लोक निर्माण विभाग और शासन की साख को भी नुकसान पहुंचा।

पूर्व गृहमंत्री ने यह भी दावा किया है कि भतपहरी के खिलाफ पूर्व में भी गंभीर शिकायतें और प्रकरण दर्ज हो चुके हैं, लेकिन राजनीतिक पहुंच और प्रभाव के चलते इन मामलों में ठोस कार्रवाई नहीं हो सकी। उन्होंने पत्र में उल्लेख किया है कि वर्ष 2011 और 2015 में राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण एवं एंटी करप्शन ब्यूरो (EOW/ACB), रायपुर में अपराध क्रमांक 56/2011 और 45/2015 दर्ज किए गए थे। ये मामले भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 के तहत दर्ज हुए थे, लेकिन लंबे समय से लंबित हैं।

कंवर ने लोक निर्माण विभाग की पदोन्नति प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा है कि अधीक्षण अभियंता (सिविल) की रिव्यू डीपीसी आयोग से कराए जाने की प्रक्रिया तय होने के बावजूद, कथित रूप से लंबित मामलों की जानकारी छिपाकर कुछ अधिकारियों को पदोन्नति का लाभ दिया गया, जिससे विभागीय पारदर्शिता पर प्रश्न खड़े होते हैं।

पत्र में सड़क निर्माण से जुड़ी अनियमितताओं का भी जिक्र किया गया है। ननकी राम कंवर के अनुसार, राजनांदगांव संभाग में मानपुर–संबलपुर मार्ग के निर्माण कार्य में स्वीकृत राशि से कहीं अधिक भुगतान किया गया। मुख्य तकनीकी परीक्षक (सतर्कता) की रिपोर्ट में अतिरिक्त व्यय और अभिलेखों की अनुपलब्धता को गंभीर अनियमितता बताया गया थ

पूर्व गृहमंत्री ने मांग की है कि विजय कुमार भतपहरी को तत्काल पद से हटाया जाए, सभी लंबित मामलों की CBI से जांच कराई जाए और लोक निर्माण विभाग को हुए कथित वित्तीय नुकसान की वसूली सुनिश्चित की जाए। फिलहाल इस मामले में संबंधित अधिकारी या शासन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

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Author: Khabri Chai

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