
छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले के पुसौर विकासखंड में अदाणी फाउंडेशन द्वारा पशुधन विकास, नस्ल सुधार और वैज्ञानिक पशुपालन को बढ़ावा देने के लिए व्यापक स्तर पर कार्य किए जा रहे हैं। ग्रामीण पशुपालकों की आय बढ़ाने और पशुधन स्वास्थ्य सेवाओं को गांवों तक पहुंचाने के उद्देश्य से संस्था द्वारा वर्ष 2025–26 के दौरान कई महत्वपूर्ण कार्यक्रम संचालित किए गए हैं।
फाउंडेशन की पहल का मुख्य लक्ष्य संयंत्र के आसपास के गांवों में पशुधन स्वास्थ्य, डेयरी प्रबंधन और चारा संवर्द्धन को बढ़ावा देकर ग्रामीणों की आजीविका को मजबूत बनाना है। इसी दिशा में आयोजित गतिविधियों का सकारात्मक प्रभाव क्षेत्र में देखने को मिल रहा है।
वर्ष 2025–26 के दौरान कुल 19 पशु स्वास्थ्य शिविर आयोजित किए गए, जिनमें 2062 पशुओं की जांच और उपचार किया गया। इसके साथ ही 2820 पशुओं का डिवर्मिंग (कृमिनाशन) किया गया, जिससे पशुओं को बीमारियों से बचाने और उनकी उत्पादक क्षमता बढ़ाने में मदद मिली। इन शिविरों में 387 बांझ पशुओं की पहचान की गई, जिनमें से 219 पशुओं का सफल उपचार किया गया। ग्रामीणों का कहना है कि अब पशु स्वास्थ्य सेवाएं गांवों तक पहुंचने लगी हैं, जिससे इलाज के लिए दूर जाने की आवश्यकता कम हुई है और पशुपालन पहले की तुलना में अधिक सुविधाजनक हो गया है।

पशुधन प्रबंधन और डेयरी तकनीकों को बेहतर बनाने के लिए फाउंडेशन ने 10 प्रशिक्षण कार्यक्रम भी आयोजित किए। इन कार्यक्रमों में कुल 334 ग्रामीणों ने भाग लिया, जिनमें 144 पुरुष और 190 महिलाएं शामिल रहीं। प्रशिक्षण छोटे भंडार, सरवानी, जेवरीडीह, अमलीभौना, कोटमरा, अमलीपाली, चिखली, रैबार, सूपा और कारिछापर जैसे गांवों में आयोजित किए गए। इसमें पशुपालकों को पशु स्वास्थ्य प्रबंधन, रोग नियंत्रण, उन्नत नस्ल, संतुलित आहार और डेयरी उत्पादन से जुड़ी वैज्ञानिक जानकारी दी गई।
नस्ल सुधार के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय कार्य किया गया है। वर्ष 2025–26 में कुल 483 कृत्रिम गर्भाधान कराए गए, जिनसे अब तक 221 उन्नत नस्ल के बछड़ों का जन्म हुआ है। इनमें 180 बछिया शामिल हैं, जो भविष्य में दुग्ध उत्पादन बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। इससे स्थानीय स्तर पर डेयरी व्यवसाय को मजबूती मिलने की उम्मीद है

पशुओं के पोषण को ध्यान में रखते हुए चारा संवर्द्धन कार्यक्रम भी संचालित किया गया। छह गांवों के 50 पशुपालकों को 200 किलोग्राम बरसीम और 50 किलोग्राम ओट्स के बीज वितरित किए गए। इस पहल से कुल 80 पशुपालक प्रत्यक्ष रूप से लाभान्वित हुए, जिससे पशुओं के लिए बेहतर पोषण उपलब्ध हो सकेगा और उत्पादन क्षमता में वृद्धि होगी।
यदि परियोजना के समग्र प्रभाव की बात करें तो वर्ष 2022 से जनवरी 2026 तक कुल 45 पशु स्वास्थ्य शिविरों के माध्यम से 9104 पशुओं की जांच और उपचार किया जा चुका है। वहीं 49 प्रशिक्षण कार्यक्रमों में 1970 किसानों ने भागीदारी की है। ग्रामीणों ने इन कार्यक्रमों को पशु स्वास्थ्य सुधार, दुग्ध उत्पादन बढ़ाने और आर्थिक स्थिति मजबूत करने में उपयोगी बताया है।
रुचिदा और रैबार गांव के पशुपालकों—भरत लाल साहू, मोहन लाल साहू, हिराधर पटेल, टेकराम पटेल, गणपत सिदार और दिनमणि सिदार—ने बताया कि इन शिविरों और प्रशिक्षणों से पशुपालन से जुड़ी आवश्यक सेवाएं और जानकारी अब स्थानीय स्तर पर ही उपलब्ध हो रही हैं।

फाउंडेशन के प्रतिनिधि के अनुसार संस्था का उद्देश्य पशुधन स्वास्थ्य, नस्ल सुधार और डेयरी प्रबंधन को मजबूत कर ग्रामीण समुदाय की आजीविका को सशक्त बनाना है। आने वाले समय में सेवाओं की पहुंच और बढ़ाने तथा अधिक पशुपालकों को तकनीकी सहायता प्रदान करने की योजना है। कार्यक्रमों के संचालन में बायफ संस्था के पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. संतोष कुमार, एआई टेक्नीशियन बिकास बराल, पशु सखी और फाउंडेशन की टीम की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
छत्तीसगढ़ में फाउंडेशन शिक्षा, स्वास्थ्य, महिला सशक्तिकरण, कौशल विकास, पर्यावरण संरक्षण और ग्रामीण विकास जैसे क्षेत्रों में भी कार्य कर रहा है। रायगढ़, कोरबा, सरगुजा और बलौदाबाजार सहित कई जिलों में चल रही योजनाओं के माध्यम से ग्रामीण समुदायों के जीवन स्तर को बेहतर बनाने का प्रयास किया जा रहा है।
Author: Khabri Chai
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