
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार को असम के दौरे पर हैं और उन्होंने डिब्रूगढ़ के मोरन हाईवे पर बनी इमरजेंसी लैंडिंग फैसिलिटी (ELF) का दौरा किया। यह एयरस्ट्रिप चीन सीमा से लगभग 300 किलोमीटर दूर स्थित है और सैन्य रणनीति के लिहाज से बेहद अहम मानी जा रही है। प्रधानमंत्री मोदी की मौजूदगी में इस हाईवे पर राफेल, सुखोई और तेजस सहित 16 लड़ाकू विमानों ने एरियल शो किया, जिसमें हाईवे से ही लैंडिंग और टेक-ऑफ का प्रदर्शन किया गया। यह डेमो करीब 30 मिनट तक चला।
मोरन हाईवे पर बनी यह ELF नॉर्थ-ईस्ट में पहली ऐसी इमरजेंसी लैंडिंग फैसिलिटी है, जो युद्ध और प्राकृतिक आपदाओं जैसी आपात स्थितियों में सैन्य और नागरिक दोनों प्रकार के विमानों के संचालन के लिए तैयार की गई है। वायुसेना ने ELF को विशेष रूप से नॉर्थ-ईस्ट में प्राकृतिक आपदाओं, युद्ध और राहत अभियानों में तेजी लाने के लिए बनाया है।
मोरन एयरस्ट्रिप को NH-127 के 4.4 किलोमीटर लंबे हिस्से पर विकसित किया गया है। यह देश की पहली ऐसी हाईवे आधारित इमरजेंसी लैंडिंग फैसिलिटी है, जो 40 टन तक के फाइटर एयरक्राफ्ट और 74 टन तक के मैक्सिमम टेक-ऑफ वेट वाले ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट को संभालने में सक्षम है। ELF का मतलब है कि जरूरत पड़ने पर हवाई जहाजों को हाईवे पर ही उतारा और उड़ान भरी जा सकती है। इससे हाईवे का डुअल-यूज सुनिश्चित होता है, यानी रोजमर्रा के ट्रैफिक के साथ-साथ सैन्य जरूरतों के लिए भी।

प्रधानमंत्री मोदी ने इस मौके पर 5,450 करोड़ रुपये के विकास प्रोजेक्ट्स का उद्घाटन भी किया। यह उनका पिछले तीन महीनों में असम का तीसरा दौरा है। असम में इसी साल विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। राज्य में पिछले तीन चुनावों में NDA की सरकार रही है। इससे पहले 2001 से 2016 तक कांग्रेस की सरकार थी।
इस दौरे के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने न केवल मोरन हाईवे पर ELF का निरीक्षण किया, बल्कि वायुसेना के कर्मियों और अधिकारियों से इस सुविधा के महत्व और संचालन पर चर्चा भी की। ELF की खासियत यह है कि यह हाईवे पर आपातकालीन लैंडिंग के लिए तैयार की गई है और इसे आधुनिक डुअल-यूज इंफ्रास्ट्रक्चर के सिद्धांत पर बनाया गया है।
विशेष रूप से यह कहा जा रहा है कि इस तरह की सुविधा नॉर्थ-ईस्ट में भारत की सुरक्षा को और मजबूत करेगी। ELF का निर्माण इस इलाके की भौगोलिक और सैन्य स्थिति को ध्यान में रखते हुए किया गया है। यह सुविधा न केवल सैन्य विमानों के लिए बल्कि आपदा प्रबंधन और नागरिक राहत अभियानों के लिए भी प्रयोग की जा सकती है।
मोरन हाईवे पर विमान प्रदर्शन ने लोगों में उत्साह और सुरक्षा के प्रति आत्मविश्वास बढ़ाया है। राफेल, सुखोई और तेजस विमानों की हाईवे लैंडिंग और टेक-ऑफ ने यह साबित किया कि भारत की वायुसेना किसी भी आपात स्थिति में नॉर्थ-ईस्ट में तेज़ी से प्रतिक्रिया करने में सक्षम है।
इस दौरे और ELF के उद्घाटन के बाद असम में विकास, सुरक्षा और रणनीतिक महत्व पर केंद्रित बहस तेज होने की संभावना है। प्रधानमंत्री मोदी के दौरे और हाईवे पर फाइटर विमानों के प्रदर्शन को लेकर सोशल मीडिया पर भी भारी चर्चा देखने को मिली है।
Author: Khabri Chai
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