गाजा पट्टी में युद्धविराम लागू होने के बाद हालात एक बार फिर जटिल होते नजर आ रहे हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, हमास ने अपने प्रभाव वाले इलाकों में अंदरूनी नियंत्रण को काफी हद तक मजबूत कर लिया है। इसी बीच अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा प्रस्तावित ‘बोर्ड ऑफ पीस’ की बैठक गुरुवार को वॉशिंगटन में होने जा रही है, लेकिन इसके शुरुआती दस्तावेजों में गाजा का स्पष्ट उल्लेख नहीं होने से विवाद और बढ़ गया है।
गाजा में हमास की पकड़ मजबूत होने का दावा
बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक, गाजा के एक स्थानीय कार्यकर्ता मोहम्मद दियाब ने दावा किया है कि हमास ने उन क्षेत्रों के 90% से अधिक हिस्से पर फिर से नियंत्रण स्थापित कर लिया है जहां पहले उसका प्रभाव था। उनके अनुसार, युद्धविराम के बाद पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां दोबारा सड़कों पर लौट आई हैं और अपराध नियंत्रण के साथ-साथ विरोधियों और संदिग्ध सहयोगियों के खिलाफ कार्रवाई कर रही हैं।
स्थानीय सूत्रों का कहना है कि युद्धविराम के बाद प्रशासनिक व्यवस्था को दोबारा संगठित करने की कोशिश की जा रही है। हालांकि, इस स्थिति को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता भी जताई जा रही है, क्योंकि इससे क्षेत्र में स्थायी शांति की संभावना प्रभावित हो सकती है

ट्रम्प का ‘बोर्ड ऑफ पीस’ और विवाद
दूसरी ओर, ट्रम्प द्वारा प्रस्तावित ‘बोर्ड ऑफ पीस’ की पहली बैठक गुरुवार को वॉशिंगटन में आयोजित हो रही है, जिसमें लगभग 60 देशों को आमंत्रित किया गया है। इस बैठक में गाजा पट्टी में शांति, पुनर्निर्माण और स्थिरता से जुड़ी योजना पर चर्चा की जानी है।
हालांकि, मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार बोर्ड के शुरुआती दस्तावेजों में गाजा का स्पष्ट उल्लेख नहीं है। ट्रम्प ने कहा कि इस बोर्ड का उद्देश्य केवल गाजा तक सीमित नहीं बल्कि वैश्विक स्तर पर शांति स्थापित करना है। कई यूरोपीय देशों ने इसे ट्रम्प का व्यक्तिगत प्रोजेक्ट बताते हुए इसमें शामिल होने से इनकार कर दिया है।

ट्रम्प के पास व्यापक अधिकार
बोर्ड के चार्टर के अनुसार, ट्रम्प को इसका प्रथम अध्यक्ष बनाया गया है और उनके पास व्यापक अधिकार होंगे। उन्हें वीटो पावर दी गई है, जिससे वे किसी भी फैसले को रोक सकते हैं। बोर्ड के सदस्यों की नियुक्ति, हटाने, एजेंडा तय करने और नई इकाइयों के गठन जैसे प्रमुख अधिकार भी उनके पास होंगे।
चार्टर के मुताबिक, यह पद ट्रम्प के राष्ट्रपति पद से स्वतंत्र होगा और वे पद छोड़ने के बाद भी चेयरमैन बने रह सकते हैं। उन्हें केवल एग्जीक्यूटिव बोर्ड की सर्वसम्मति से ही हटाया जा सकता है, जबकि एग्जीक्यूटिव बोर्ड के सदस्यों की नियुक्ति भी ट्रम्प द्वारा ही की जाएगी।
किन देशों की भागीदारी, किसने बनाई दूरी
रिपोर्ट्स के अनुसार, करीब 60 देशों को इस पहल में शामिल होने का निमंत्रण दिया गया था, जिनमें से लगभग 27 देशों ने सहमति जताई है। अर्जेंटीना, हंगरी और पाकिस्तान जैसे देशों के प्रतिनिधियों के शामिल होने की संभावना जताई जा रही है। बेलारूस ने निमंत्रण स्वीकार किया है, लेकिन वहां के राष्ट्रपति स्वयं बैठक में शामिल नहीं होंगे।
वहीं कई यूरोपीय देशों, न्यूजीलैंड और कुछ सहयोगी राष्ट्रों ने इस पहल से दूरी बनाई है। न्यूजीलैंड के विदेश मंत्री ने कहा कि बोर्ड का काम संयुक्त राष्ट्र के सिद्धांतों के अनुरूप होना चाहिए। कई देशों को आशंका है कि यह पहल संयुक्त राष्ट्र की भूमिका को कमजोर कर सकती है।
गाजा के पुनर्निर्माण और फंडिंग योजना
ट्रम्प ने कहा है कि सदस्य देश गाजा में मानवीय सहायता और पुनर्निर्माण के लिए 5 बिलियन डॉलर से अधिक की सहायता देने का वादा करेंगे। बोर्ड की स्थायी सदस्यता के लिए पहले वर्ष में 1 बिलियन डॉलर नकद देने की शर्त भी रखी गई है, हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि किन देशों ने यह राशि देने की सहमति दी है।
योजना के तहत ‘इंटरनेशनल स्टेबिलाइजेशन फोर्स’ (ISF) की तैनाती का प्रस्ताव भी शामिल है, जो गाजा की सीमाओं की सुरक्षा, हथियारों को नष्ट करने और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का काम करेगी। फिलहाल इंडोनेशिया ने सार्वजनिक रूप से करीब 2,000 सैनिक भेजने की बात कही है।

हथियार छोड़ने पर हमास और इजराइल आमने-सामने
हमास ने स्पष्ट कहा है कि जब तक इजराइली सेना पूरी तरह गाजा से नहीं हटती, वह हथियार नहीं डालेगा। संगठन के नेताओं का कहना है कि इस मुद्दे पर अभी कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है।
वहीं इजराइल का कहना है कि जब तक हमास पूरी तरह निरस्त्र नहीं होता, सेना गाजा से नहीं हटेगी। इजराइल ने हमास को हथियार छोड़ने के लिए समय सीमा भी दी है। इजराइल का आरोप है कि युद्धविराम का इस्तेमाल हमास दोबारा संगठित होने के लिए कर रहा है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ती चिंता
विशेषज्ञों का मानना है कि गाजा की मौजूदा स्थिति मध्य पूर्व में स्थायी शांति की राह में बड़ी चुनौती बन सकती है। युद्धविराम के बावजूद दोनों पक्षों के बीच तनाव बना हुआ है और मानवीय संकट भी गहराता जा रहा है।
अंतरराष्ट्रीय समुदाय की निगाहें अब ट्रम्प के ‘बोर्ड ऑफ पीस’ की बैठक और उसके निर्णयों पर टिकी हैं। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि यह पहल गाजा में स्थिरता और शांति स्थापित करने में कितनी प्रभावी साबित होती है या नए विवादों को जन्म देती है।
Author: Khabri Chai
Khabri Chai news portal.





