ईरान का बड़ा खेल! जंग के बीच भी जारी तेल सप्लाई

मध्य-पूर्व में जारी तनाव के बीच ईरान ने अपने तेल और गैस निर्यात को बनाए रखते हुए वैश्विक ऊर्जा बाजार में मजबूती दिखाई है। हालिया घटनाक्रम में सैन्य तनाव बढ़ने के बावजूद ईरान का प्रमुख तेल निर्यात केंद्र खार्ग आइलैंड टर्मिनल सक्रिय बना हुआ है, जिससे देश की आय पर बड़ा असर नहीं पड़ा है।

ऊर्जा क्षेत्र की अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं, जैसे International Energy Agency और S&P Global के अनुमानों के अनुसार, ईरान वर्तमान में प्रतिदिन लगभग 1.7 से 2 मिलियन बैरल कच्चे तेल का निर्यात कर रहा है। यह निर्यात मुख्यतः एशियाई बाजारों, खासकर चीन की ओर जारी है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, देश के कुल तेल निर्यात का लगभग 90% हिस्सा खार्ग टर्मिनल से ही संचालित हो रहा है।

हालांकि, साउथ पार्स गैस फील्ड पर हुए हमलों से गैस उत्पादन प्रभावित हुआ है, लेकिन सप्लाई पूरी तरह बंद नहीं हुई। इसके अलावा, होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों पर अतिरिक्त शुल्क वसूले जाने की खबरें भी सामने आई हैं, जिससे क्षेत्रीय तनाव का आर्थिक आयाम और गहरा हो गया है।

वहीं दूसरी ओर, खाड़ी क्षेत्र के अन्य प्रमुख तेल उत्पादक देशों—जैसे सऊदी अरब, कतर, इराक, कुवैत और संयुक्त अरब अमीरात—की आपूर्ति प्रभावित हुई है। समुद्री मार्गों पर बढ़ते खतरे, हमलों की आशंका और लॉजिस्टिक बाधाओं के चलते इन देशों के उत्पादन में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है।

इस पूरे घटनाक्रम का सीधा असर वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमतें 112 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं, जो पिछले कुछ वर्षों में उच्च स्तरों में से एक है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कीमतें 100 डॉलर से ऊपर बनी रहती हैं, तो इसका असर आयात-निर्भर देशों, खासकर भारत, पर पड़ेगा और महंगाई बढ़ सकती है।

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Author: Khabri Chai

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