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छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में एक बड़े अंतरराष्ट्रीय साइबर फ्रॉड का खुलासा हुआ है, जहां फर्जी कॉल सेंटर के जरिए अमेरिकी नागरिकों को निशाना बनाया जा रहा था। पुलिस की कार्रवाई में इस मामले में कुल 42 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जिसमें मुख्य रूप से गुजरात के दो मास्टरमाइंड शामिल हैं।
जानकारी के अनुसार, आरोपियों ने रायपुर में एक ऑफिस खोलकर उसे कॉल सेंटर का रूप दिया था। यहां 12वीं पास युवाओं को लगभग ₹15,000 मासिक वेतन पर नौकरी दी जाती थी। इन युवकों को अंग्रेजी नहीं आने के बावजूद विदेशी ग्राहकों से बात करवाया जाता था। इसके लिए उन्हें पहले से कागज पर हिंदी में स्क्रिप्ट लिखकर दी जाती थी, जिसे वे अंग्रेजी में पढ़कर सुनाते थे।

यह गैंग अमेरिकी नागरिकों को बैंक लोन, क्रेडिट कार्ड और CIBIL स्कोर सुधारने का झांसा देता था। कॉल के दौरान खुद को बैंक या फाइनेंस कंपनी का अधिकारी बताकर लोगों का भरोसा जीता जाता था। इसके बाद उनसे प्रोसेसिंग फीस, सिक्योरिटी चार्ज या अन्य बहानों से पैसे ऐंठे जाते थे।
जांच में यह भी सामने आया है कि इस ठगी का नेटवर्क केवल भारत तक सीमित नहीं था, बल्कि इसका कनेक्शन चीन तक जुड़ा हुआ था। तकनीकी सपोर्ट और कॉल रूटिंग सिस्टम विदेश से ऑपरेट किए जा रहे थे, जिससे पुलिस को ट्रैकिंग में कठिनाई हो रही थी।
पुलिस के अनुसार, आरोपी इंटरनेट कॉलिंग और VOIP तकनीक का इस्तेमाल करते थे, जिससे उनकी लोकेशन छुपी रहती थी। साथ ही, फर्जी आईडी और सॉफ्टवेयर के जरिए खुद को असली कंपनी का प्रतिनिधि दिखाते थे।

इस पूरे मामले में यह भी सामने आया है कि कई युवा बिना पूरी जानकारी के इस गिरोह का हिस्सा बन गए थे। उन्हें केवल नौकरी और सैलरी का लालच देकर इस अवैध काम में लगाया गया।
फिलहाल पुलिस ने सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है और मामले की गहन जांच जारी है। अधिकारियों का कहना है कि यह एक संगठित अंतरराष्ट्रीय साइबर अपराध है, जिसके और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं।
Author: Khabri Chai
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