7 लाख छात्रों की परीक्षा में बड़ी लापरवाही! कॉपियां फट रहीं, स्याही आर-पार

प्रदेश में लगभग 7 लाख छात्रों के लिए आयोजित की जा रही 5वीं और 8वीं की केंद्रीकृत परीक्षा अब गंभीर सवालों के घेरे में आ गई है। बोर्ड परीक्षा की तर्ज पर कराई जा रही इस परीक्षा में उपयोग किए गए प्रश्नपत्र और उत्तरपुस्तिकाओं की गुणवत्ता को लेकर छात्रों, अभिभावकों और शिक्षकों ने नाराजगी जताई है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, राज्य स्तर से भेजी गई प्रश्नपत्र-सह-उत्तरपुस्तिकाओं के पन्ने बेहद पतले हैं। स्थिति यह है कि जैसे ही छात्र पेन या पेंसिल से लिखते हैं, स्याही दूसरी तरफ साफ दिखाई देने लगती है। कई जगहों पर तो कॉपियां इतनी कमजोर पाई गईं कि लिखते समय ही पन्ने फटने लगे।

इससे परीक्षा दे रहे छात्रों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। लिखने में दिक्कत होने के कारण उनकी स्पीड और प्रस्तुति दोनों प्रभावित हो रही हैं। छोटे बच्चों के लिए यह स्थिति और भी चुनौतीपूर्ण बन गई है, क्योंकि उन्हें बार-बार पन्ने संभालकर लिखना पड़ रहा है।

शिक्षकों का कहना है कि इस तरह की खराब गुणवत्ता की उत्तरपुस्तिकाएं परीक्षा की निष्पक्षता पर भी सवाल खड़े करती हैं। अगर एक छात्र की कॉपी फट जाती है या लिखावट साफ नहीं दिखती, तो उसके मूल्यांकन पर भी असर पड़ सकता है।

अभिभावकों ने भी इस मामले में नाराजगी जाहिर की है और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि जब परीक्षा इतनी बड़े स्तर पर आयोजित की जा रही है, तो सामग्री की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए था।

शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि उन्हें इस समस्या की जानकारी मिली है और मामले की जांच कराई जा रही है। जरूरत पड़ने पर संबंधित एजेंसी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की लापरवाही से न केवल छात्रों का मनोबल गिरता है, बल्कि शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता भी प्रभावित होती है। ऐसे में जरूरी है कि भविष्य में इस तरह की गलतियों से बचने के लिए सख्त गुणवत्ता नियंत्रण लागू किया जाए।

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Author: Khabri Chai

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