ग्रामीण बस योजना का असर: जशपुर के गाँवों में आई नई उम्मीद

छत्तीसगढ़ के दूरस्थ और पहाड़ी क्षेत्रों में अब बदलाव साफ नजर आने लगा है। जिन गाँवों में कभी बस की कल्पना भी नहीं की जा सकती थी, आज वहाँ बस के पहुंचते ही बच्चों के चेहरे खिल उठते हैं। सड़क पर बस दिखाई देते ही बच्चे उत्साह से हाथ हिलाते हैं, वहीं हॉर्न की आवाज सुनते ही ग्रामीण घरों से बाहर निकल आते हैं। यह दृश्य सिर्फ एक वाहन के आने का नहीं, बल्कि ग्रामीण जीवन में आई नई उम्मीद का प्रतीक है।

यह सकारात्मक बदलाव मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना के जरिए संभव हुआ है, जिसे विष्णु देव साय की सरकार ने ग्रामीण कनेक्टिविटी मजबूत करने के उद्देश्य से शुरू किया है। इस योजना के तहत अब बसें उन इलाकों तक पहुंच रही हैं, जहां पहले लोगों को पैदल या निजी साधनों के सहारे लंबी दूरी तय करनी पड़ती थी।

जशपुर जिले के बगीचा विकासखंड के सन्ना गांव की आंगनबाड़ी कार्यकर्ता सुनीता निकुंज बताती हैं कि पहले उन्हें अपने केंद्र तक पहुंचने के लिए लिफ्ट मांगनी पड़ती थी या पैदल चलना पड़ता था। पहाड़ी रास्तों के कारण यह सफर काफी कठिन होता था। अब बस सेवा शुरू होने से उनकी यह समस्या काफी हद तक खत्म हो गई है।

इसी तरह मरंगी गांव के निवासी दशरथ भगत बताते हैं कि पहले उन्हें रोजाना कई किलोमीटर पैदल चलकर बाजार जाना पड़ता था, लेकिन अब बस सेवा से उनका सफर आसान हो गया है। वहीं मंगलराम जैसे ग्रामीण भी बताते हैं कि अब छिछली और चंपा जैसे बाजारों तक पहुंचना पहले की तुलना में काफी सरल हो गया है।

इस योजना का सबसे बड़ा फायदा छात्रों और कर्मचारियों को मिल रहा है। अब बच्चे समय पर स्कूल पहुंच पा रहे हैं, जबकि सरकारी कर्मचारी भी अपनी ड्यूटी समय पर निभा पा रहे हैं। इसके अलावा स्वास्थ्य सेवाओं, बाजार और प्रशासनिक कार्यों के लिए शहर तक पहुंचना भी आसान हुआ है।

ग्रामीण बस सेवा ने न केवल परिवहन की सुविधा दी है, बल्कि यह योजना गांवों को मुख्यधारा से जोड़ने का मजबूत माध्यम बन रही है। जशपुर जैसे दूरस्थ क्षेत्रों में यह पहल विकास की नई राह खोल रही है और ‘विकसित भारत’ के सपने को जमीनी स्तर पर साकार करती नजर आ रही है।

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Author: Khabri Chai

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