“छिपने की जगह नहीं बची” – पापा राव ने बताई सरेंडर की असली वजह

छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में लंबे समय तक सक्रिय रहे नक्सली नेता पापा राव ने आखिरकार आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में वापसी कर ली है। पश्चिम बस्तर डिवीजन में संगठन की कमान संभाल चुके पापा राव का यह कदम न केवल सुरक्षा बलों के बढ़ते दबाव को दर्शाता है, बल्कि क्षेत्र में कमजोर पड़ते नक्सल नेटवर्क की ओर भी इशारा करता है।

आत्मसमर्पण के बाद मीडिया से बातचीत में पापा राव ने साफ कहा कि उन्होंने डर के कारण नहीं, बल्कि परिस्थितियों के चलते यह फैसला लिया। उनके अनुसार, जिस इलाके में वे सक्रिय थे, वहां सुरक्षा बलों ने लगातार अभियान चलाते हुए करीब 18 कैंप स्थापित कर दिए थे। इससे जंगल में छिपने और गतिविधियां संचालित करने की संभावनाएं लगभग खत्म हो गई थीं।

उन्होंने बताया कि संगठन के कई साथी पहले ही सरेंडर कर चुके थे, जिससे नेटवर्क कमजोर होता जा रहा था। ऐसे में संगठनात्मक ढांचा भी प्रभावित हुआ और काम करना मुश्किल होता चला गया। पापा राव ने यह भी स्वीकार किया कि अब वे सामान्य जीवन जीना चाहते हैं और सबसे पहले अपने परिवार के साथ समय बिताएंगे।

राजनीति में आने के सवाल पर उन्होंने कहा कि वे भविष्य में चुनाव लड़ने की इच्छा रखते हैं। हालांकि, किस पार्टी से चुनाव लड़ेंगे, इस पर अभी कोई निर्णय नहीं लिया गया है। उनका मानना है कि अब वे लोकतांत्रिक प्रक्रिया के जरिए अपनी बात लोगों तक पहुंचाना चाहते हैं।

लेवी और फंडिंग को लेकर पूछे गए सवाल पर पापा राव ने कहा कि पैसे की जिम्मेदारी किसी एक व्यक्ति के पास नहीं होती थी। अलग-अलग इलाकों में अलग-अलग लोग इसे संभालते थे, इसलिए पूरी जानकारी किसी एक के पास नहीं होती।

संगठन के अंदर पदों को लेकर उन्होंने कहा कि नियुक्ति केवल वरिष्ठता के आधार पर नहीं होती, बल्कि व्यक्ति की क्षमता और कार्यकुशलता को प्राथमिकता दी जाती है।

दिलचस्प बात यह रही कि पापा राव ने अपने ‘मारे जाने’ की अफवाहों पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा कि वे चार बार ‘मर’ चुके हैं—कभी बीमारी से, कभी सांप के काटने से। उन्होंने इसे मीडिया में फैली अफवाहों का नतीजा बताया।

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Author: Khabri Chai

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