कांग्रेस के भीतर पश्चिम एशिया संकट और रसोई गैस आपूर्ति को लेकर अलग-अलग राय सामने आई है, जिससे पार्टी के अंदर मतभेद खुलकर दिखाई दे रहे हैं। कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं कमलनाथ, आनंद शर्मा और शशि थरूर ने इन मुद्दों पर केंद्र सरकार के रुख की सराहना की है, जबकि राहुल गांधी लगातार सरकार और प्रधानमंत्री पर निशाना साध रहे हैं।
पूर्व केंद्रीय मंत्री आनंद शर्मा ने भारत की कूटनीतिक रणनीति की प्रशंसा करते हुए कहा कि सरकार ने पश्चिम एशिया में जारी तनावपूर्ण हालात को समझदारी और कुशलता से संभाला है। उन्होंने इसे परिपक्व और संतुलित प्रतिक्रिया बताया। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसी जटिल अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों में सभी राजनीतिक दलों को साथ लेकर चलना जरूरी होता है और इस दिशा में सर्वदलीय बैठक आयोजित करना एक सकारात्मक कदम है।

वहीं मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने देश में रसोई गैस की कथित कमी को लेकर अलग दृष्टिकोण रखा। उन्होंने कहा कि देश में गैस की कोई वास्तविक कमी नहीं है, बल्कि इसे बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जा रहा है। कमलनाथ के अनुसार कुछ लोग राजनीतिक लाभ के लिए जानबूझकर भय का माहौल बना रहे हैं।
कमलनाथ के इस बयान पर केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के वरिष्ठ नेता खुद स्वीकार कर रहे हैं कि देश में पेट्रोल, डीजल और गैस की कोई कमी नहीं है। यह बयान राजनीतिक बहस को और तेज कर रहा है।
इसी क्रम में कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने भी पश्चिम एशिया संकट पर भारत सरकार के संयमित रुख का समर्थन किया। उन्होंने अपने एक लेख में लिखा कि अंतरराष्ट्रीय मामलों में भारत की चुप्पी या संतुलित प्रतिक्रिया को कमजोरी नहीं माना जाना चाहिए, बल्कि यह एक रणनीतिक और जिम्मेदार कूटनीति का हिस्सा है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत के राष्ट्रीय हित इस क्षेत्र से जुड़े हुए हैं, इसलिए सोच-समझकर कदम उठाना आवश्यक है।

दूसरी ओर, राहुल गांधी ने इन मुद्दों पर सरकार की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में देश को ईंधन संकट का सामना करना पड़ सकता है, क्योंकि ऊर्जा सुरक्षा प्रभावित हो रही है। राहुल गांधी के अनुसार, यह स्थिति गलत विदेश नीति का परिणाम है और सरकार को समय रहते तैयारी करनी चाहिए।
राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि देश के सामने एक बड़ी चुनौती आने वाली है और सरकार को इसे गंभीरता से लेना चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि समय रहते उचित कदम नहीं उठाए गए, तो इसका असर करोड़ों लोगों पर पड़ सकता है।

इस पूरे घटनाक्रम से यह साफ होता है कि कांग्रेस पार्टी के भीतर इन अहम मुद्दों को लेकर एकरूपता नहीं है। जहां कुछ वरिष्ठ नेता सरकार के कदमों को संतुलित और प्रभावी मान रहे हैं, वहीं पार्टी का शीर्ष नेतृत्व सरकार की नीतियों पर सवाल उठा रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ऐसे मतभेद आने वाले चुनावों में पार्टी की रणनीति और संदेश पर असर डाल सकते हैं। फिलहाल, यह मुद्दा राष्ट्रीय राजनीति में चर्चा का केंद्र बना हुआ है और आने वाले दिनों में इस पर और प्रतिक्रियाएं सामने आ सकती हैं।
Author: Khabri Chai
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