
छत्तीसगढ़ और ओडिशा के बीच लंबे समय से चल रहे महानदी जल विवाद में एक अहम अपडेट सामने आया है। केंद्र सरकार ने महानदी जल विवाद ट्रिब्यूनल का कार्यकाल 9 महीने बढ़ाकर अब 13 जनवरी 2027 तक कर दिया है। इस फैसले के बाद अब दोनों राज्यों सहित देशभर की नजरें 2027 की शुरुआत पर टिक गई हैं, जब इस बहुप्रतीक्षित विवाद पर अंतिम निर्णय आने की उम्मीद है।
महानदी देश की प्रमुख नदियों में से एक है, जिसका उद्गम छत्तीसगढ़ के सिहावा पर्वत से होता है। लगभग 851 किलोमीटर लंबी यह नदी छत्तीसगढ़, ओडिशा, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और झारखंड से होकर बहती है और अंततः बंगाल की खाड़ी में मिल जाती है। यह नदी करोड़ों लोगों की आजीविका, सिंचाई, पेयजल और बिजली उत्पादन का प्रमुख स्रोत है, इसलिए इसे दोनों राज्यों की “लाइफलाइन” भी कहा जाता है।
महानदी जल बंटवारे को लेकर विवाद की शुरुआत वर्ष 1983 में हुई थी, जब छत्तीसगढ़ अलग राज्य नहीं था और यह मामला मध्य प्रदेश तथा ओडिशा के बीच था। समय के साथ कई दौर की बातचीत और समझौते हुए, लेकिन स्थायी समाधान नहीं निकल सका।

विवाद ने 2016 में गंभीर रूप ले लिया, जब ओडिशा सरकार ने केंद्र से हस्तक्षेप की मांग करते हुए अंतरराज्यीय नदी जल विवाद अधिनियम 1956 के तहत औपचारिक शिकायत दर्ज कराई। इसके बाद 12 मार्च 2018 को ट्रिब्यूनल का गठन किया गया, ताकि मामले की निष्पक्ष जांच कर समाधान निकाला जा सके।
ट्रिब्यूनल बनने से पहले केंद्र सरकार ने बातचीत के जरिए विवाद सुलझाने के लिए एक नेगोशिएशन कमेटी भी बनाई थी, लेकिन सहमति नहीं बनने के कारण यह प्रयास असफल रहा। इसके बाद न्यायाधिकरण ही एकमात्र विकल्प बचा।
हालांकि, ट्रिब्यूनल की कार्यवाही कई बार बाधित भी हुई। कोरम की कमी, प्रशासनिक कारणों, पूर्व अध्यक्ष ए.एम. खानविलकर के इस्तीफे और COVID-19 महामारी के चलते सुनवाई में देरी हुई, जिसके कारण इसकी समय-सीमा को कई बार बढ़ाना पड़ा।

जांच प्रक्रिया के तहत ट्रिब्यूनल की टीम ने छत्तीसगढ़ के रायपुर, बिलासपुर और कोरबा जिलों का दौरा कर ग्राउंड सर्वे भी किया। इस दौरान महानदी और इसकी सहायक नदियों—जैसे शिवनाथ और हसदेव—पर बनी परियोजनाओं का निरीक्षण किया गया और दोनों राज्यों से विस्तृत तकनीकी डेटा लिया गया।
ओडिशा का आरोप है कि छत्तीसगढ़ में बनाए गए बांधों और बैराजों के कारण नदी का प्राकृतिक प्रवाह कम हुआ है, जिससे हीराकुंड बांध में जल स्तर घटा है और खेती, उद्योग तथा पेयजल आपूर्ति प्रभावित हो रही है। वहीं छत्तीसगढ़ सरकार इन आरोपों को खारिज करते हुए कहती है कि नदी में आने वाले पानी का बड़ा हिस्सा उसकी सहायक नदियों से आता है, इसलिए जल बंटवारे में उसके अधिकारों की अनदेखी नहीं की जा सकती।
महानदी विवाद केवल कानूनी मुद्दा नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की आजीविका और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था से जुड़ा विषय है। ऐसे में ट्रिब्यूनल का फैसला सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
अब कार्यकाल में मिले 9 महीने के अतिरिक्त समय के साथ उम्मीद जताई जा रही है कि 2027 की शुरुआत में इस 44 साल पुराने विवाद का अंतिम समाधान सामने आ सकता है।
Author: Khabri Chai
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