ट्रेन ब्लास्ट’ के बाद मची अफरा-तफरी, NDRF और रेलवे ने दिखाई जांबाजी

Manendragarh स्टेशन यार्ड में उस वक्त अफरा-तफरी का माहौल बन गया, जब ट्रेन हादसे की सूचना मिलते ही सायरन गूंज उठे और बचाव दल तेजी से हरकत में आ गए। देखते ही देखते पूरा स्टेशन यार्ड किसी युद्ध क्षेत्र में तब्दील हो गया। दरअसल यह दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे बिलासपुर मंडल और NDRF द्वारा आयोजित विशाल संयुक्त मॉक ड्रिल थी, जिसका उद्देश्य संभावित रेल आपदा के दौरान राहत एवं बचाव कार्यों की तैयारी को परखना था।मॉक ड्रिल के तहत सुबह करीब 10 बजे स्टेशन यार्ड में खड़ी चिरमिरी-रीवा स्पेशल ट्रेन के एक स्लीपर कोच में बम विस्फोट की काल्पनिक स्थिति बनाई गई। परिदृश्य के अनुसार धमाके में 5 यात्रियों की मौत हो गई, जबकि 15 यात्री घायल हुए, जिनमें 8 गंभीर और 7 सामान्य रूप से घायल बताए गए। विस्फोट के बाद कोच पटरी से उतर गया और उसमें भीषण आग लग गई।घटना की सूचना मिलते ही RPF, स्थानीय पुलिस और डॉग स्क्वाड की टीम मौके पर पहुंची। संदिग्ध पार्सल की जांच के बाद विशेषज्ञों ने बम की पुष्टि कर उसे सुरक्षित तरीके से डिस्पोज किया। इसके तुरंत बाद दुर्घटना राहत यान (ART) और चिकित्सा यान (ARME) के साथ रेलवे और NDRF की टीमों ने मोर्चा संभाला।

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रेस्क्यू ऑपरेशन का सबसे चुनौतीपूर्ण हिस्सा धुएं से भरे ‘जीरो ऑक्सीजन जोन’ में फंसे यात्रियों को बाहर निकालना था। इस दौरान SECL माइंस टीम ने भी अपनी विशेष तकनीकी क्षमता का प्रदर्शन किया। NDRF की 11वीं बटालियन और रेलवे आपदा प्रबंधन टीम ने गैस कटर की मदद से कोच की खिड़कियां काटीं और अंदर फंसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला।मॉक ड्रिल में संरक्षा विभाग, सिविल डिफेंस, स्काउट-गाइड, सेंट जॉन्स एम्बुलेंस और फायर ब्रिगेड की टीमों ने भी अहम भूमिका निभाई। मौके पर अपर मंडल रेल प्रबंधक श्रीनिवास, वरिष्ठ मंडल संरक्षा अधिकारी साकेत रंजन, वरिष्ठ मंडल यांत्रिक अभियंता दीपक ठाकुर और उप मुख्य संरक्षा अधिकारी आर.के. देवांगन समेत कई अधिकारी मौजूद रहे।रेलवे अधिकारियों ने बताया कि यह मॉक ड्रिल केवल अभ्यास नहीं, बल्कि रेलवे की ‘जीरो टॉलरेंस’ सुरक्षा नीति का हिस्सा है। इस सफल प्रदर्शन ने यह साबित किया कि बिलासपुर मंडल किसी भी आपदा या आपात स्थिति से निपटने के लिए 24×7 तैयार है।

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Author: Khabri Chai

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