दिल्ली-NCR में ट्रांसपोर्टरों की 3 दिन की हड़ताल, जरूरी सामानों की सप्लाई पर असर

दिल्ली व पूरे राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में रहने वाले लोगों के लिए आने वाले दिन बेहद मुश्किल भरे साबित हो सकते हैं. ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस (AIMTC) के नेतृत्व में आगामी 21, 22 और 23 मई को तीन दिवसीय चक्का जाम का ऐलान किया गया है. इस आंदोलन में दिल्ली-एनसीआर की 68 से अधिक ट्रांसपोर्ट यूनियन व एसोसिएशन एकजुट हो चुकी हैं. ट्रांसपोर्टरों की नाराजगी वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM), अदालतों व दिल्ली सरकार की उन नीतियों के खिलाफ है, जिन्हें वे पूरी तरह से अव्यावहारिक और ट्रांसपोर्टर विरोधी मान रहे हैं.ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष हरीश सभरवाल के मुताबिक, इस हड़ताल में 20 लाख से अधिक मालवाहक वाहन (ट्रक और कमर्शियल गाड़ियां) शामिल हो रहे हैं और सड़कों पर नहीं उतरेंगे. हालांकि हड़ताल 21 मई से शुरू हो रही है, लेकिन इसका असली व व्यापक असर 22, 23 और 24 मई को देखने को मिलेगा.दिल्ली में रोजाना कोलकाता, नासिक और देश के अन्य हिस्सों से करीब 6,000 मालवाहक वाहन फल, सब्जियां और दवाइयां जैसी आवश्यक वस्तुएं लेकर आते हैं. इन सभी रूटों के ऑपरेटरों ने हड़ताल को अपना पूर्ण समर्थन दिया है. इतनी भारी संख्या में गाड़ियों के पहिए थमने से दिल्ली, नोएडा, गुरुग्राम, गाजियाबाद व फरीदाबाद में सप्लाई चेन पूरी तरह बाधित हो जाएगी, जिससे मंडियों में सामान की किल्लत होने व दैनिक उपभोग की वस्तुओं के दाम बढ़ने की पूरी आशंका है.

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हाल ही में 15 मई को फरीदाबाद में हुई एक मत्त्वपूर्ण बैठक में ट्रांसपोर्टरों ने साफ कर दिया कि सरकार के फैसले उनकी रोजी-रोटी छीन रहे हैं. संगठनों का कहना है कि यदि सरकार ने इन नीतियों पर पुनर्विचार नहीं किया तो भविष्य में इस चक्का जाम को अनिश्चितकालीन भी किया जा सकता है.हरीश सभरवाल ने दिल्ली सरकार की टैक्स नीतियों पर गंभीर सवाल उठाए हैं. एक आरटीआई (RTI) से मिले आंकड़ों का हवाला देते हुए उन्होंने बताया कि वर्ष 2015 से 2023 के बीच दिल्ली सरकार ने पर्यावरण मुआवजा शुल्क (ECC) के नाम पर 1,491 करोड़ रुपये वसूले हैं. यानी सालाना औसतन 1000 करोड़ रुपये से ज्यादा की रकम वसूली जा रही है. ट्रांसपोर्टर गाड़ी खरीदते समय रोड टैक्स देते हैं और 1 लीटर डीजल पर 10 रुपये का अतिरिक्त शुल्क भी भुगतते हैं.

टैक्स का नया और भारी-भरकम बोझ:

  • पहले जहां पर्यावरण शुल्क 1,400 रुपये था, उसे बढ़ाकर अब 2,000 कर दिया गया है. इसके अलावा 1,200 रुपये दिल्ली नगर निगम (MCD) का शुल्क अलग से है.
  • जिन बड़ी गाड़ियों से पहले 2,600 ECC लिया जाता था, अब उनसे 4,000 रुपये (ECC) और 1,200 (MCD शुल्क) वसूला जा रहा है.
  • जो गाड़ियां ईस्टर्न व वेस्टर्न पेरीफेरल वे का इस्तेमाल कर दिल्ली के बाहर-बाहर निकल जाती हैं, उनसे भी ये शुल्क अवैध रूप से वसूला जा रहा है.
Khabri Chai
Author: Khabri Chai

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