छत्तीसगढ़ कांग्रेस में इन दिनों सांगठनिक नियुक्तियों को लेकर एक बेहद चौंकाने वाला और ‘अजब-गजब’ मामला सामने आया है। राजनीति में दलबदल आम बात है, लेकिन किसी दूसरी पार्टी के सक्रिय नेता को अपनी ही पार्टी के एक प्रमुख विंग की कमान सौंप देना… ऐसा केवल आज की कांग्रेस में ही देखने को मिल सकता है। मामला एमसीबी (मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर) जिले का है, जहाँ विधानसभा चुनाव 2023 के दौरान कांग्रेस को ‘बाय-बाय’ कहकर गोंडवाना गणतंत्र पार्टी (GGP) का गमछा ओढ़ने वाले मनोज कुमार साहू को कांग्रेस पार्टी ने ओबीसी प्रकोष्ठ का जिलाध्यक्ष नियुक्त कर दिया है।
हैरानी की बात यह है कि राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि मनोज साहू वर्तमान में कांग्रेस के प्राथमिक सदस्य तक नहीं हैं, फिर भी उन्हें इतनी बड़ी जिम्मेदारी से नवाज दिया गया है। इस फैसले के बाद से ही स्थानीय कार्यकर्ताओं और निष्ठावान नेताओं के बीच भारी असंतोष और कानाफूसी का दौर शुरू हो गया
अगर इतिहास और दस्तावेजों के पन्नों को पलटें, तो यह नियुक्ति पूरी तरह से सवालों के घेरे में आ जाती है:
- 21 अक्टूबर 2023 (इस्तीफे की दास्तान): विधानसभा चुनाव 2023 के ठीक पहले, जब मनेन्द्रगढ़ विधानसभा से तत्कालीन कांग्रेस विधायक डॉ. विनय जायसवाल का टिकट काटा गया, तो उनके समर्थक और तत्कालीन ब्लॉक कांग्रेस कमेटी खड़गवां के अध्यक्ष मनोज कुमार साहू भड़क गए। उन्होंने 21 अक्टूबर 2023 को प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज के नाम एक बकायदा पत्र जारी कर अपना इस्तीफा सौंप दिया। उन्होंने पत्र में साफ लिखा था कि “पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारियों द्वारा मुझे और मेरे करीबी कार्यकर्ताओं को दरकिनार किया जा रहा है, ऐसी स्थिति में कार्य कर पाना संभव नहीं है।”
- 22 अक्टूबर 2023 (कांग्रेस की त्वरित कार्रवाई): मनोज साहू के इस्तीफे और उनके विपक्षी दल में जाने की खबर मिलते ही जिला कांग्रेस कमेटी (मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर) के अध्यक्ष अशोक श्रीवास्तव ने 22 अक्टूबर 2023 को एक आधिकारिक आदेश (पत्र क्र. DPM/10/23-24/11) जारी किया। इस आदेश में स्पष्ट लिखा गया था कि “मनोज कुमार साहू द्वारा पद से इस्तीफा देने और गोंडवाना गणतंत्र पार्टी में शामिल होने के कारण सूर्य प्रकाश उइके को खड़गवां ब्लॉक का कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त किया जाता है।”
कांग्रेस से बगावत करने के बाद मनोज साहू सीधे गोंडवाना गणतंत्र पार्टी (गोंगपा) के खेमे में चले गए थे। खुद गोंगपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पाली-तानाखार से वर्तमान विधायक तुलेश्वर हीरा सिंह मरकाम ने मनोज साहू को पार्टी का पारंपरिक गमछा पहनाकर बकायदा अपनी पार्टी में प्रवेश कराया था। चुनाव के दौरान मनोज साहू ने कांग्रेस के खिलाफ जमीन पर काम भी किया।
इस ‘अद्भुत’ नियुक्ति के बाद जिला कांग्रेस के भीतर एक नया विवाद खड़ा हो गया है। पार्टी के भीतर ही दबी जुबान में अब ये तीखे सवाल पूछे जा रहे हैं:
- बिना घर वापसी के कैसे मिला पद? जो नेता खुलेआम दूसरी पार्टी की सदस्यता ले चुका हो, बिना उसकी विधिवत कांग्रेस में वापसी कराए सीधे जिलाध्यक्ष जैसा बड़ा पद कैसे सौंप दिया गया?
- समीक्षा में कहाँ हुई चूक? क्या प्रदेश नेतृत्व और ओबीसी प्रकोष्ठ के बड़े नेताओं को स्थानीय जमीनी हकीकत और मनोज साहू के पुराने बगावती इतिहास की जानकारी नहीं थी?
- निष्ठावानों का क्या? जो कार्यकर्ता विपरीत परिस्थितियों में भी कांग्रेस का झंडा थामे रहे, उन्हें दरकिनार कर ‘दलबदलुओं’ को उपकृत करने की यह कैसी नीति है?

दस्तावेज साफ गवाही दे रहे हैं कि जिस नेता को खुद जिला कांग्रेस कमेटी ने ‘गोंडवाना पार्टी’ में जाने की पुष्टि करते हुए पद से हटाया था, आज उसी नेता को ओबीसी विंग की कमान सौंपकर कांग्रेस ने खुद को ही बैकफुट पर ला खड़ा किया है। अब देखना यह होगा कि इस ‘अजब-गजब’ नियुक्ति पर मचे बवाल के बाद कांग्रेस आलाकमान क्या डैमेज कंट्रोल करता है या फिर विरोध के सुर ऐसे ही सुलगते रहेंगे।
Author: Khabri Chai
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