भिलाई। छत्तीसगढ़ के भिलाई से एक बेहद असंवेदनशील और अमानवीय मामला सामने आया है। यहाँ कोसानाला स्थित सरकारी गो आश्रय केंद्र (गोशाला) में गायों का दूध निकालने के लिए मृत बछड़े की खाल में भूसा भरकर उसका पुतला इस्तेमाल किया जा रहा था। इस पूरे मामले का भंडाफोड़ बुधवार को ‘मां लक्ष्मी गौ रक्षक सेवा समिति’ ने किया। समिति ने इस क्रूरता के खिलाफ सुपेला थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई है और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।
बता दें कि कोसानाला स्थित यह गो आश्रय केंद्र भिलाई नगर निगम के अधीन संचालित होता है। इसके संचालन की जिम्मेदारी ‘नई उड़ान शहर स्तरीय महिला स्व-सहायता समूह’ और ठेकेदार रामअवतार के पास है। वर्ष 2020 से इस गोशाला का संचालन कर रहा यह महिला समूह गोबर से खाद निर्माण और दुग्ध उत्पादन का काम देखता है। वर्तमान में यहाँ 10 दुधारू गायें हैं। वहीं, मवेशियों के चारे, पानी और मजदूरों की व्यवस्था का जिम्मा ठेकेदार का है।
‘मां लक्ष्मी गौ रक्षक सेवा समिति’ के अध्यक्ष सुनील यादव ने बताया कि गोशाला में जिन गायों के बछड़े मर चुके थे, उनका अंतिम संस्कार करने के बजाय उनकी खाल निकालकर उसमें भूसा भर दिया गया। गायों को झांसा देकर अधिक से अधिक दूध निकालने के लिए इस नकली पुतले को उनके सामने रखा जाता था। समिति ने इसे घोर अमानवीय और पशु क्रूरता की पराकाष्ठा बताया है।
“निजी स्वार्थ और चंद पैसों के फायदे के लिए मृत बछड़े की खाल का ऐसा इस्तेमाल करना बेहद निंदनीय है। यह न सिर्फ पशुओं के प्रति क्रूरता है, बल्कि गोमाता की आस्था के साथ भी खिलवाड़ है।” – सुनील यादव, अध्यक्ष (मां लक्ष्मी गौ रक्षक सेवा समिति)

समिति ने गोशाला के प्रबंधन पर गंभीर लापरवाही के भी आरोप लगाए हैं। निरीक्षण के दौरान पाया गया कि गोशाला में जगह-जगह कीचड़ और गंदगी का अंबार लगा हुआ है। गायों को समय पर न तो साफ पानी मिल रहा है और न ही चारा, जिसके कारण मवेशियों की सेहत लगातार बिगड़ रही है।
इस सनसनीखेज खुलासे के बाद ‘मां लक्ष्मी गौ रक्षक सेवा समिति’ ने सुपेला थाने में मामले की लिखित शिकायत देकर दोषियों के खिलाफ तुरंत FIR दर्ज करने की मांग की है। शिकायत में स्पष्ट किया गया है कि यह गोशाला संचालन में गंभीर अनियमितता, लापरवाही और पशु क्रूरता निवारण अधिनियम का खुला उल्लंघन है। अब देखना यह होगा कि नगर निगम प्रशासन और पुलिस प्रशासन इस अमानवीय कृत्य पर क्या ठोस कार्रवाई करता है।
Author: Khabri Chai
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